कोरपना की डालमिया सीमेंट कंपनी में एसिड हादसा, दो लोग झुलसे
नारंडा स्थित संयंत्र में सल्फ्यूरिक एसिड खाली करते समय हुई लापरवाही, अक्षय कन्नाके और स्वाती उइके गंभीर रूप से घायल, मुआवजे और कार्रवाई की मांग।

कोरपना तहसील के नारंडा स्थित डालमिया सीमेंट कंपनी का मुख्य प्रवेश द्वार जहां सल्फ्यूरिक एसिड टैंकर खाली करते समय हुए हादसे में दो कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए।
कोरपना : कोरपना तहसील के नारंडा स्थित डालमिया सीमेंट कंपनी में सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही के चलते एक गंभीर हादसा सामने आया है। सल्फ्यूरिक एसिड से भरे टैंकर को खाली करते समय हुई चूक के कारण दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद कंपनी के सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रशासन की लापरवाही और कंपनी की हठधर्मी नीति के कारण मजदूरों के परिवारों को बेसहारा छोड़ देने का आरोप विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने लगाया है। इस संबंध में उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 25 फरवरी की दोपहर की बताई जा रही है। सल्फ्यूरिक एसिड से भरे ट्रक से कंपनी के टैंकर में एसिड खाली किया जा रहा था। एसिड खाली होने के बाद नियमानुसार कनेक्टर नोजल को जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा बंद किया जाना आवश्यक था। किंतु बताया जा रहा है कि जिम्मेदार कर्मचारी के अनुपस्थित रहने से ट्रक चालक द्वारा ट्रक से नोजल खोलकर छोड़ दिया गया, जिससे टैंक में मौजूद सल्फ्यूरिक एसिड तेज दबाव के साथ बाहर निकलने लगा।
चपेट में आए दो युवा, हालत गंभीर
इस दौरान पास ही खड़े ठेकेदार के पास हेल्पर के रूप में कार्यरत अक्षय विजय कन्नाके (निवासी नारंडा) तथा कंपनी में प्रशिक्षण ले रही स्वाती उइके (निवासी चंद्रपुर) पर एसिड गिर गया। अचानक एसिड बाहर आने से दोनों वहां से भागने लगे, लेकिन तेज प्रवाह के कारण एसिड उनकी पीठ पर गिर गया, जिससे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के करीब 2 घंटे बाद दोनों घायलों को चंद्रपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के अनुसार बुधवार 3 मार्च को अक्षय को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और स्वाती उइके अभी भी चंद्रपुर के अस्पताल में भर्ती बताई जा रही है।
पीड़ितों के परिवारों की मांग और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना में गंभीर रूप से घायल हुए अक्षय गरीब किसान परिवार का इकलौता कमाऊ पुत्र बताया जा रहा है। इस हादसे के बाद घायल युवक के माता-पिता ने कंपनी से अपने पुत्र को स्थायी नौकरी देने और आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुधीर भाऊ मुनगंटीवार ने पीड़ितों को 25 लाख रुपए हर्जाना देने की मांग की है। वहीं, विजय वडेट्टीवार ने "पीड़ितों को बेसहारा छोड़ने का आरोप" लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
कंपनी के सुरक्षा मानकों पर उठते सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनी में सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। करीब एक महीने पहले ही ठेकेदारी में कार्यरत पवन रमेश देवतड़े (निवासी पिपरी) का हाथ गंभी हादसे में कट गया था। आरोप है कि कंपनी प्रशासन द्वारा ऐसे मामलों को अक्सर दबाने की कोशिश की जाती है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के चलते अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कंपनी में सुरक्षा मानकों का पालन कितनी गंभीरता से किया जा रहा है और बार-बार हो रही दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
न्याय की प्रतीक्षा और भविष्य की आशंका
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर घटना के बाद कंपनी प्रबंधन और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या कंपनी के लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी या नहीं? यदि ऐसा नहीं होता है तो पीड़ित कामगारों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा कैसे दिलाया जाता है। क्या एसिड जैसे खतरनाक रसायनों को संभालने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाता है? क्या कामगारों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कंपनी प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था को सख्ती से लागू नहीं किया, तो भविष्य में और भी गंभीर दुर्घटनाएं होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

Pratahkal Bureau
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