कपास आयात शुल्क माफी बढ़ाने पर केंद्र सरकार की आलोचना, नितीन सेलकर ने उठाई किसानों की मांग
केंद्र सरकार ने कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क माफी 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। नितीन सेलकर ने फैसले का विरोध करते हुए कपास के भाव, किसानों के नुकसान और 12,000 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की मांग उठाई है।

महाराष्ट्र के विदर्भ में कपास उत्पादक किसानों की आर्थिक मुश्किलों के बीच केंद्र सरकार की ओर से कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क माफी की अवधि बढ़ाने के फैसले को लेकर विरोध शुरू हो गया है। हिंगणघाट के नितीन सेलकर ने केंद्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे किसान विरोधी बताया और कहा कि इससे विदर्भ तथा मराठवाड़ा के लाखों कपास उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने कपास आयात पर दी गई 11 प्रतिशत आयात शुल्क माफी की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। Notification No. 35/2026-Customs के तहत 30 अक्टूबर 2026 को यह निर्णय लिया गया। नितीन सेलकर ने कहा कि देश के कपास उत्पादक किसानों को इस फैसले का कड़ा विरोध करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष सूखे जैसी परिस्थितियों और बढ़ती मजदूरी के कारण विदर्भ के कपास उत्पादक किसान पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सरकार की ओर से घोषित 8,717 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी उत्पादन लागत से कम है। किसानों के घरों में अभी कपास रखा हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार विदेशी कपास का आयात सस्ता करके घरेलू कपास के दाम गिराने की स्थिति पैदा कर रही है।
नितीन सेलकर के अनुसार, पिछले सीजन में देश ने रिकॉर्ड 71 लाख गांठ कपास का आयात किया था। इस वर्ष भी ऐसी ही स्थिति बनने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आयात के कारण स्थानीय बाजार में कपास के भाव 9,000 रुपये से गिरकर सीधे 7,500 से 8,000 रुपये तक पहुंचने का खतरा है।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' की बात करती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को आर्थिक संकट में डालकर विदेशी कपास के लिए रास्ता आसान बना रही है। उनके अनुसार, यह सरकार की दोहरी नीति है।
सेलकर ने कहा कि कपास आयात शुल्क माफी की अवधि बढ़ाने के फैसले से लाभ केवल बड़े कपड़ा मिल मालिकों को होगा, जबकि इसका आर्थिक नुकसान विदर्भ और मराठवाड़ा के लाखों कपास उत्पादक किसानों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार के इस निर्णय का सार्वजनिक रूप से विरोध करते हुए ईश्वर से सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना भी की।
उन्होंने केंद्र सरकार से कपास आयात शुल्क माफी तत्काल रद्द करने, कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 12,000 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने और भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के खरीद केंद्र राज्य के प्रत्येक तालुका मुख्यालय में तत्काल शुरू करने की मांग की है।
कपास आयात शुल्क में छूट की अवधि बढ़ाने के फैसले ने घरेलू कपास उत्पादकों के हितों और किसानों को मिलने वाले बाजार मूल्य को लेकर सवाल खड़े किए हैं। नितीन सेलकर ने सरकार से किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की अपील की है।

