तळोदा तहसील के वाल्हेरी गांव में वनसंवर्धन और जलसंचयन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्रामसभा के माध्यम से वनाधिकार कानून को मनरेगा से जोड़ते हुए सामूहिक वनाधिकार क्षेत्र में दगडी नाला बांध निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिससे स्थानीय ग्रामस्थों में उत्साह का माहौल है।

नंदुरबार जिले में टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई और जिलाधिकारी कार्यालय के सहयोग से कुल 20 गांवों में वनाधिकार कानून की प्रभावी अमलवारी की जा रही है। इसी पहल के तहत 2018 में वाल्हेरी ग्रामसभा को अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासियों के forest rights act 2006 तथा नियम 2008 एवं 2012 के अनुसार 274.82 हेक्टेयर सामूहिक वनाधिकार भूमि प्राप्त हुई। इस क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन, पुनरुत्थान और प्रबंधन की कानूनी जिम्मेदारी ग्रामसभा को सौंपी गई है।

ग्रामसभा ने विस्तृत शिवार फेरी करते हुए सामूहिक वनक्षेत्र का सीमांकन, जैवविविधता का दस्तावेजीकरण, संरक्षण नियमावली का निर्माण और आवश्यक कार्यों का मूल्यांकन कर पाँच वर्षीय सामूहिक वनसंसाधन प्रबंधन आराखड़ा तैयार किया। इस आराखड़े को तळोदा तहसील कन्वर्जेंस समिति और नंदुरबार जिला कन्वर्जेंस समिति से मंजूरी प्राप्त हुई।

इस परियोजना को आगे बढ़ाने में जिलाधिकारी डॉ. मिताली सेठी, प्रकल्प अधिकारी अनय नावंदर, मनरेगा उपजिलाधिकारी महेश चौधरी, उपवनसंरक्षक सुहास चव्हाण और अन्य अधिकारियों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला। वहीं जिला समन्वयक अमोल राठोड़, वनरक्षक नामदेव डोंगरे, रोजगार सेवक रायसिंग पाडवी तथा सामूहिक वनाधिकार प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अमरसिंग नाइक सहित स्थानीय ग्रामस्थों और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने अहम भूमिका निभाई।

दगडी नाला बांध के निर्माण से न केवल वन एवं जलसंवर्धन को मजबूती मिलेगी बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे, जिससे गांव के आर्थिक एवं पर्यावरणीय विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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