मराठवाड़ा की राजनीतिक उर्वरा भूमि लातूर ने एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत को स्पष्ट और कड़ा संदेश दे दिया है। लातूर शहर महानगरपालिका के चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि इस शहर की नब्ज आज भी दिवंगत विलासराव देशमुख के परिवार और कांग्रेस की विचारधारा के साथ धड़क रही है। भारतीय जनता पार्टी और पूर्व मंत्री संभाजीराव पाटील निलंगेकर के आक्रामक चुनावी अभियान को दरकिनार करते हुए लातूर की जनता ने कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा और ऐतिहासिक जनादेश दिया है। महानगरपालिका की सत्ता के इस महासंग्राम में कांग्रेस ने ४७ सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि भाजपा महज २२ सीटों पर सिमटकर रह गई है। अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस को केवल १ सीट से संतोष करना पड़ा है, जो सत्ताधारी गठबंधन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

कुल ७० सीटों के लिए हुए इस चुनाव में ६०.८८ प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। मतगणना के शुरुआती दौर से ही कांग्रेस का दबदबा कायम रहा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि विधायक अमित देशमुख के नेतृत्व पर लातूर की जनता का अटूट विश्वास बरकरार है। जिस प्रकार विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था, ठीक उसी तर्ज पर महानगरपालिका चुनाव में भी निलंगेकर पैनल को मतदाताओं ने पूरी तरह नकार दिया। इस विजय में कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाडी का गठबंधन 'एक्स-फैक्टर' साबित हुआ। वंचित के ४ उम्मीदवारों की जीत ने न केवल गठबंधन को मजबूती दी, बल्कि कांग्रेस की राह भी आसान कर दी। जीत के बाद भावुक होते हुए विधायक अमित देशमुख ने कहा कि लातूर हमेशा से कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा रहा है और वंचित बहुजन आघाडी का साथ इस निर्णायक मोड़ पर बेहद महत्वपूर्ण रहा।

इस चुनाव के परिणामों ने कई दिग्गजों के राजनीतिक करियर पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मतदाताओं ने इस बार रसूख और पारिवारिक विरासत के बजाय काम को प्राथमिकता दी, जिसके चलते कई पूर्व महापौर, उपमहापौर और रसूखदार मंत्रियों के रिश्तेदारों को हार का मुंह देखना पड़ा। दिलचस्प बात यह रही कि शिवसेना के दोनों गुट (शिंदे और उद्धव), शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस, एमआयएम और निर्दलीय उम्मीदवारों का खाता तक नहीं खुल सका। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी पुरजोर चर्चा है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विधायक रविंद्र चव्हाण द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी भाजपा पर भारी पड़ गई। लातूर की अस्मिता और विलासराव देशमुख के प्रति सम्मान ने मतदाताओं को कांग्रेस के पक्ष में एकजुट करने का काम किया। यह परिणाम केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि विकास के प्रति विश्वास और अहंकार के विरुद्ध जनता का कड़ा प्रहार माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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