'प्रौढ़ प्रताप पुरंदर, क्षत्रिय कुलावतंस, सिंहासनाधीश्वर, महाराजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज की जय...' के गगनभेदी जयघोष, चिमगांव के वाद्य दल के जोशीले हलगी वादन और शानदार आतिशबाजी के बीच मुरगूड शहर शिवमय हो उठा। हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के पावन अवसर पर तिथि अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज के 353वें शिवराज्याभिषेक समारोह का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूरे उत्साह के साथ किया गया।

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के ऐतिहासिक दिन छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। इसी ऐतिहासिक क्षण की स्मृति में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी तिथि अनुसार शिवराज्याभिषेक समारोह आयोजित किया गया।

समारोह का मुख्य आकर्षण राज्याभिषेक पूजन रहा, जिसका सम्मान शिवभक्त सर्जेराव भाट को प्राप्त हुआ। उनके हाथों विधिवत पूजन संपन्न हुआ। स्थानीय पुरोहितों ने शास्त्रोक्त विधि से अभिषेक और सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।

पूजन के बाद शिवतीर्थ से मुरगूड के ग्रामदेवता अंबाबाई मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा मार्ग में उपस्थित शिवभक्तों और नागरिकों को महाप्रसाद वितरित किया गया।

चिमगांव के वाद्य दल के पारंपरिक हलगी वादन ने पूरे समारोह को विशेष आकर्षण प्रदान किया। युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जबकि भव्य आतिशबाजी से पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठा। मुरगूड शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिवभक्त और नागरिक समारोह में शामिल हुए।

इस भव्य शिवराज्याभिषेक समारोह के सफल आयोजन में वी. आर. भोसले (सर), विजय आरेकर, भडजी अवधूत सामानगडकर, तानाजी भराडे, समाधान हेंदळकर, गोपाल काटकर, राहुल गुरव, कृष्णात सावंत, दिगंबर पाटील, मारुति सूर्यवंशी, सचिन सुळकुडे, आनंदा रामाने, प्रफुल कांबळे, सुभाष आणावकर और प्रकाश पारिशवाड सहित अनेक शिवभक्तों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Pratahkal Bureau

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