छत्रपती संभाजीनगर की राजनीति में बुधवार, 30 दिसंबर को उस समय बड़ा मोड़ आ गया, जब भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच चला आ रहा गठबंधन औपचारिक रूप से टूट गया। इस राजनीतिक घटनाक्रम की आधिकारिक घोषणा स्वयं पालकमंत्री संजय शिरसाट ने की, जिससे नगर की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आई।

उम्मीदवारों के नामांकन की समय-सीमा समाप्त होने तक गठबंधन को बनाए रखने को लेकर दोनों दलों के बीच लगातार संवाद और प्रयास जारी थे। इसी क्रम में शहर स्तर पर स्थानीय नेताओं की कुल नौ बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें गठबंधन की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा हुई। इन बैठकों में एक अहम बैठक बीजेपी के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुळे की मौजूदगी में भी संपन्न हुई, जिससे सियासी हलकों में समझौते की उम्मीदें और प्रबल हो गई थीं।

हालांकि, तमाम बैठकों और संवादों के बावजूद दोनों दलों के बीच मतभेद समाप्त नहीं हो सके। अंततः गठबंधन को लेकर सहमति न बनने पर यह स्पष्ट हो गया कि राजनीतिक राहें अब अलग होने जा रही हैं। पालकमंत्री संजय शिरसाट ने गठबंधन टूटने के बाद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने शिवसेना को लंबे समय तक भ्रम की स्थिति में रखा और अंततः विश्वासघात किया। उनके अनुसार, गठबंधन को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ सके।

बीजेपी–शिवसेना गठबंधन के इस टूटने को छत्रपती संभाजीनगर की स्थानीय राजनीति के लिए एक निर्णायक क्षण माना जा रहा है। आने वाले चुनावी समीकरणों, रणनीतियों और राजनीतिक समीकरणों पर इसका दूरगामी असर पड़ने की संभावना है, जिससे शहर की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है।

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