बारिश का मौसम शुरू होने से ठीक पहले अपने खेतों तक पहुंचने के रास्ते की बदहाली से त्रस्त किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। अमरावती जिले की चांदूर बाजार तहसील कार्यालय के सामने लोकविकास संघटना के नेतृत्व में किसानों ने प्रशासन की कुंभकर्णी नींद उड़ाने के लिए एक बेहद अनोखा और आक्रामक 'नींद निकालो' आंदोलन शुरू किया है। सरकार द्वारा किसानों को उनके खेतों तक सुगम पहुंच मार्ग प्रदान करने के लिए पानंद रास्ते बनाने की एक महत्वाकांक्षी योजना तो तैयार की गई थी, लेकिन तहसील प्रशासन के सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना व्यवस्थापन के कारण ये पानंद रास्ते आज तक नहीं बन पाए हैं। इसी सुस्त प्रशासनिक रवैये के प्रति अपना कड़ा रोष प्रकट करने और प्रशासन का ध्यान अपनी गंभीर समस्याओं की ओर केंद्रित करने के लिए आंदोलकारी किसान सीधे तहसील कार्यालय के सामने ही जमीन पर सो गए।

अमरावती जिले के चांदूर बाजार और मोर्शी तहसील में अनेक पानंद रास्तों के काम लंबे समय से प्रलंबित पड़े हुए हैं, जिससे किसानों के दिलों में व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष उमड़ रहा है। अन्नदाताओं के हित में बनाई गई यह सड़क योजना जमीनी स्तर पर इतनी कछुआ गति और भयावह स्थिति से चल रही है कि किसानों को अपनी ही खेती तक पहुंचने के लिए रोजाना अनेक कठिन समस्याओं और बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि अमरावती जिले के पालकमंत्री तथा महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे हर रोज किसानों के कल्याण के लिए नई-नई योजनाओं का आगाज कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर किसानों के प्रलंबित रास्ते अभी तक दुरुस्त नहीं हो सके हैं। इसी विरोधाभास और सुस्त प्रशासन के खिलाफ किसानों के मन में पनप रहे असंतोष को उजागर करने के लिए सोमेश्वर शहाणे के अनुसार, लोकविकास संघटना के बैनर तले चांदूर बाजार तहसील के सामने यह बेमियादी 'नींद निकालो' आंदोलन किया गया है, जिसने अब एक बड़ा रूप अख्तियार कर लिया है।

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