चंद्रपुर के चिमूर तहसील के जवराबोडी गांव में स्थित जिला परिषद स्कूल की जर्जर अवस्था को लेकर पिछले दो वर्षों से जारी संघर्ष अंततः रंग लाया। लंबे समय से छत की सीमेंट की चादरें गिरने, दीवारों के क्षतिग्रस्त होने और छात्रों के लिए असुरक्षित वातावरण के बावजूद प्रशासन द्वारा अनदेखी किए जाने पर लगातार आवाज उठाई जाती रही। मगर अब स्कूल भवन के पुनर्निर्माण के लिए बीस लाख रुपये की मंजूरी और नया टेंडर जारी होने से छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में राहत की भावना है।

इस मुद्दे पर लगातार सक्रिय रहते हुए कमलाकर ठाकरे ने जिला परिषद का दरवाजा बार-बार खटखटाया, लेकिन कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। स्कूल की खस्ताहाल स्थिति से चिंतित शिक्षकों ने भी कई बार प्रशासन को जानकारी दी, फिर भी समस्या जस की तस बनी रही। अंततः पावसाल में कमलाकर ठाकरे ने स्कूल परिसर में पत्रकार परिषद बुलाकर इमारत की गंभीर हालत मीडिया के सामने रखी, जिसके बाद आंदोलन का संकेत देते हुए स्कूल को प्रतीकात्मक रूप से बंद कर पंचायत समिति चिमूर के सामने विरोध का इशारा दिया गया।

मामले की व्यापक कवरेज के बाद प्रशासन हरकत में आया। स्कूल की निरीक्षण टीम भेजी गई और छात्रों को अस्थायी रूप से अन्य स्थान पर शिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध करवाई गई। इसके बाद शासन ने जर्जर भवन के निर्माण के लिए 20 लाख रुपये का विशेष निधि मंजूर किया। 3 दिसंबर 2025 को जारी हुए टेंडर के अनुसार हॉल, पोर्च और शौचालय-बाथरूम के निर्माण कार्य का ठेका शंकरपुर के प्रगत नामदेव सहारे को प्रदान किया गया है।

गांव के नागरिकों और शिक्षकों ने उम्मीद जताई है कि निर्माण कार्य जल्द आरंभ होकर निर्धारित समय में पूरा होगा, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। दो वर्षों तक इस मुद्दे को उठाने वाले कमलाकर ठाकरे ने भी कहा कि मंजूर निधि से गुणवत्तापूर्ण निर्माण होने की अपेक्षा है, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

Pratahkal Newsroom

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