चंद्रपुर में भारतीय परिवार बचाव संगठन की ओर से ‘परिवार जोड़ो संपर्क अभियान’ चलाकर दुभंगते परिवारों को फिर से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि भारतीय समाज पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण में मशगूल है, जिसकी परिणीति परिवारों में बढ़ती दूरी के रूप में सामने आ रही है। पिछले कुछ दिनों में अनेक परिवारों में सास-बहू और पति-पत्नी के विवाद के कारण परिवार टूटने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

ऐसे परिवारों का समुपदेशन कर दुराव दूर करने और परिवार के सदस्यों को फिर साथ लाने का काम भारतीय परिवार बचाव संगठन कर रहा है। अभियान के तहत पति-पत्नी के एक-दूसरे से दूर हुए हजारों परिवारों का समुपदेशन कर उन्हें एक साथ लाया जा रहा है। भारतीय परिवार बचाव संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर मैंदळकर के साथ मोहन जीवतोडे, वसंत भलमे, प्रदीप गोविंदवार, नरेंद्र पोलादे, संतोष वेखंडे, ॲड नाईक, उमेश देशट्टीवार, ॲड सारिका सिंदूरकर, ॲड नितीन घाटकीने, सचिन बरटकर, नितीन चांदेकर, बाबाराव नैताम, श्रीराम पान्हेरकर, मोहब्बत खान, डॉ राहुल विधाते और अमोल कांबळे आदि पिछले कुछ वर्षों से जिले में यह उपक्रम चला रहे हैं।

संगठन के अनुसार संयुक्त परिवार का दौर आनंदपूर्वक बीता, लेकिन अब पत्नी के अति हट्ट के कारण विभक्त परिवार पद्धति बढ़ी है और इसमें पारिवारिक विवाद चरम पर पहुंच रहे हैं। ऐसे परिवारों में वडीलधाऱ्यांचा धाक नहीं रह गया है। सास-ससुर घर में नहीं चाहिए, केवल फोटो तक सीमित रहें, ऐसा पत्नी का आग्रह होने की बात भी संगठन की ओर से कही गई है। पाश्चात्य संस्कृति के अनुकरण के कारण कई परिवार विनाश की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। पुरुषों के माता-पिता के सामने आत्महत्या करने या वृद्धाश्रम में रहने की स्थिति आने का दावा भी संगठन ने किया है।

संगठन ने सवाल उठाया है कि पत्नी को अपने माता-पिता पसंद हैं, लेकिन सास-ससुर नहीं, यह कैसा न्याय है। पति-पत्नी के बीच गलतफहमी पैदा करने में मोबाइल भी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही बेटियों के वैवाहिक जीवन में उनके माता-पिता का बढ़ता हस्तक्षेप भी कई परिवारों में दूरी का कारण बन रहा है।

नॅशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्युरो (NCRB) के अनुसार दरवर्षी एक लाख 70 हजार पुरुषों की आत्महत्या हो रही है। संगठन के अनुसार इससे पुरुषों का विवाह संस्था से विश्वास उठ गया है। पुरुषों को दहेज हत्या का भय दिखाकर तलाक के लिए अवाढव्य पैसों की मांग कर ब्लैकमेल किए जाने की बात भी कही गई है। संगठन ने पुरुषों से सावधान रहने और शर्म न करते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।

भारतीय परिवार बचाव संगठन चंद्रपुर की ओर से ‘परिवार जोड़ो संपर्क अभियान’ के माध्यम से पति-पत्नी तथा ससुराल-मायके के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों का समुपदेशन किया जा रहा है। संगठन का उद्देश्य परिवार को नुकसान से बचाते हुए परिवार में स्नेह और आनंद का वातावरण निर्माण करना है।

Manoj Gore (Chandrapur)

Manoj Gore (Chandrapur)

नाम: मनोज रामकृष्ण गोरे

वर्तमान पद: रिपोर्टर (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: चंद्रपुर जिला (महाराष्ट्र)

बीट (मुख्य विषय): प्रशासन

परिचय

मनोज रामकृष्ण गोरे महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र के रिपोर्टर हैं। वह मुख्य रूप से चंद्रपुर जिले के प्रशासनिक विभागों की कार्यप्रणाली, सरकारी योजनाओं, जनसुनवाई, विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

मनोज रामकृष्ण गोरे को मीडिया क्षेत्र में ग्राउंड रिपोर्टिंग और समाचार संकलन का 5 वर्ष का अनुभव है। वह पिछले पांच सालों से चंद्रपुर जिले के स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों को नियमित रूप से रिपोर्ट कर रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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