चंद्रपुर जिले के कोरपणा तहसील अंतर्गत सांगोड़ा गांव में दालमिया सीमेंट कंपनी, नारंडा द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे अन्याय ने एक बार फिर प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। बीते तीन वर्षों से गांव के किसानों और ग्रामीणों पर लगातार दबाव और कथित शोषण के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन 24 दिसंबर 2025 को स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब कंपनी ने प्रशासन की मदद से 70 से 80 पुलिसकर्मियों की तैनाती कर ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई की।

ग्रामीणों का आरोप है कि दालमिया सीमेंट कंपनी नियमों को दरकिनार कर फर्जी और बनावटी दस्तावेजों के आधार पर किसानों की जमीनें बेहद कम दामों में जबरन अधिग्रहित कर रही है। कई मामलों में आधी जमीन लिए जाने से शेष भूमि खेती के लायक नहीं रह गई, जिससे किसान आर्थिक संकट और भुखमरी की स्थिति में पहुंच गए हैं। इन बिखरी हुई जमीनों पर जंगली जानवरों का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें और गहरा गई हैं।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कंपनी द्वारा रोजगार के वादों के बावजूद गांव के युवाओं को काम से वंचित रखा गया है। बेरोजगारी के विरोध में गांव के युवाओं ने 23 अक्टूबर 2025 से कोरपणा में आठ दिनों तक आमरण अनशन किया था। इसके बाद चंद्रपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने 30 नवंबर 2025 को ग्रामसभा आयोजित कर समाधान का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार और कोरपणा पुलिस स्टेशन को निवेदन सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इस बीच कंपनी पर आरोप है कि उसने गांव की पानंद सड़क और श्मशान भूमि की ओर जाने वाला रास्ता भी बंद कर दिया। 24 दिसंबर 2025 को तहसीलदार, पटवारी, मंडल अधिकारी और ठाणेदार की मौजूदगी में ग्रामीणों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए जबरन काम शुरू किया गया।

मामले की गंभीरता सामने आते ही कोरपणा के युवा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष और समाजसेवी नितिन भाऊ विजय रावजी बावणे ने बिना देरी किए घटनास्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों का पक्ष मजबूती से रखा। नितिन बावणे के सख्त हस्तक्षेप के बाद प्रशासन को बातचीत के लिए आगे आना पड़ा। उनकी मौजूदगी में हुई चर्चा के दौरान तहसीलदार मैडम ने 30 दिसंबर 2025 को ग्रामीणों और दालमिया सीमेंट कंपनी के बीच मध्यस्थता बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया।

नितिन भाऊ विजय रावजी बावणे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सांगोड़ा के ग्रामीणों और किसानों को पूरा न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष थमने वाला नहीं है। ग्रामीणों ने भी एक स्वर में चेतावनी दी है कि न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। यह मामला न केवल भूमि अधिकारों और रोजगार से जुड़ा है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की भी एक बड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story