कोरपना तहसील कार्यालय के सामने वृद्ध किसान आमरण अनशन पर, 28 अगस्त को विवाद निपटाने का दावा
कोरपना में जमीन विवाद को लेकर वृद्ध किसान आमरण अनशन पर हैं। सरकारी माप के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप, 28 अगस्त को समाधान का दावा।

तस्वीर में चंद्रपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाएं से बैठे वृद्ध किसान नानाजी बोरडे, भाई जगदीश कुमार इंगले और अन्य लोग दिखाई दे रहे हैं।
चंद्रपुर जिले के कोरपना तहसील कार्यालय के सामने मौजा कोडशी खुर्द के 60 वर्षीय वृद्ध किसान नानाजी तुकाराम बोरडे और बापुराव तुकाराम बोरडे पिछले दो दिनों से अपनी जमीन के विवाद को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकारी माप का ठोस प्रमाण मौजूद होने के बावजूद राजस्व और भूमि अभिलेख अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण उन्हें अपनी जमीन के अधिकार के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। बिगर सातबारा शेतकरी संगठन के प्रणेता भाई जगदीश कुमार इंगले के नेतृत्व में यह आमरण अनशन शुरू किया गया है।
नानाजी बोरडे के स्वामित्व वाली मौजा कोडशी खुर्द स्थित खेत सर्वे नंबर 58 की सरकारी माप आधिकारिक रूप से रजिस्टर क्रमांक 1909, दिनांक 23/03/2023 को की गई थी। भूमि अभिलेख कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक ‘क’ प्रतिलिपि यानी माप नक्शे में पड़ोसी किसान देविदास ढोके और सुभाष मालेकर द्वारा बोरडे की जमीन में अतिक्रमण किए जाने की बात स्पष्ट होने का दावा किया गया है।
किसानों का आरोप है कि अतिक्रमण सिद्ध होने के बावजूद संबंधित माप अधिकारी, स्थानीय तलाठी और मंडल अधिकारी ने पीड़ित किसान को न्याय दिलाने के बजाय दूसरी पार्टी के साथ आर्थिक प्रलोभन या दबाव के चलते कथित मिलीभगत की। आरोप है कि सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए अधिकारियों ने पुलिस बंदोबस्त को गुमराह किया और 60 वर्षीय वृद्ध किसान के खेत की पूर्वी दिशा में कथित रूप से अवैध तार की बाड़ लगवा दी। किसानों ने इसे सरकारी दस्तावेजों में फेरबदल और धोखाधड़ी का गंभीर मामला बताया है।
इस मामले में नानाजी बोरडे ने अवैध बाड़ हटाने और कार्रवाई की मांग को लेकर 10/09/2023 को कोरपना तहसील कार्यालय में विधिवत आवेदन दिया था। किसानों के अनुसार, एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद तहसीलदार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद न्याय की मांग को लेकर वृद्ध किसान आमरण अनशन पर बैठ गए। अनशन शुरू होने के बाद भी कोरपना तहसीलदार द्वारा मामले की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है। परिवार के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि वृद्ध अनशनकारियों के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए कोरपना तहसीलदार और संबंधित राजस्व प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक, चंद्रपुर और उपविभागीय अधिकारी (SDO), राजुरा के समक्ष भी शिकायत पहुंचाई गई है। शिकायतकर्ताओं ने नए भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं 251, 256, 328 और 69(2) के तहत दोषी अधिकारियों तथा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
बोरडे परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक कथित अवैध बाड़ नहीं हटाई जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक आमरण अनशन वापस नहीं लिया जाएगा। किसान पुत्र मंगेश बाबुराव बोरडे और रामदास माधव बोडे ने पत्रकार परिषद में कहा कि जब तक राजस्व प्रशासन को भूमि अभिलेख कार्यालय की प्रत्यक्ष मौके की जांच और स्थल निरीक्षण से संबंधित वास्तविकता दर्शाने वाली रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती, तब तक आमरण अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
इधर, कोरपना तहसील कार्यालय के सामने चल रहे इस कृषि भूमि विवाद को लेकर कोरपना तालुका भूमि अभिलेख कार्यालय के अधीक्षक पंकज पवार ने कहा कि संबंधित किसानों की माप की जाएगी और 28 अगस्त को इस मामले का विवाद निपटाने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
मामले में एक ओर वृद्ध किसानों ने जमीन के विवाद का समाधान होने तक आमरण अनशन जारी रखने का रुख अपनाया है, वहीं भूमि अभिलेख कार्यालय ने 28 अगस्त को माप के बाद विवाद निपटाने की बात कही है।

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