नीट पेपर लीक मामला: सीबीआई जांच और शिवराज मोटेगावकर पर बढ़ी मुश्किलें
सीबीआई ने लातूर के आरोपी शिवराज मोटेगावकर के बेटे को मुख्य गवाह बनाने की तैयारी की है, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है।

नीट पेपर लीक मामले की जांच के दौरान लातूर स्थित आरसीसी कोचिंग सेंटर के बाहर खड़ी सीबीआई की टीम और (इनसेट में) आरोपी शिवराज मोटेगावकर।
लातूर | देश को झकझोर देने वाले नीट (NEET) पेपर लीक प्रकरण में एक बेहद सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। इस मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने लातूर के शिक्षा व्यवसायी और आरोपी शिवराज मोटेगावकर के खिलाफ अपने सबूतों को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ी रणनीतिक चाल चली है। जांच एजेंसी को इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्षी सीधे मोटेगावकर के ही घर से प्राप्त हुआ है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मोटेगावकर के नाबालिग बेटे, जिसने स्वयं 5 मई को नीट की परीक्षा दी थी, को सीबीआई इस मामले का मुख्य गवाह बनाने की तैयारी कर रही है। इस घटनाक्रम से मोटेगावकर की मुश्किलें गंभीर रूप से बढ़ गई हैं।
पुणे में सीबीआई द्वारा की गई सघन पूछताछ के दौरान मोटेगावकर के बेटे के बयानों ने जांच को एक नई और निर्णायक दिशा दी है। बेटे का दावा है कि नीट परीक्षा से करीब दस दिन पहले ही उसे भौतिकी (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) तीनों विषयों के प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिए गए थे। इस कथित कबूलनामे ने इस संदेह को और अधिक पुख्ता कर दिया है कि यह पेपर लीक रैकेट परीक्षा से काफी समय पहले से ही सक्रिय था। वर्तमान में सीबीआई इस बयान की पुष्टि डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स, वित्तीय लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर कर रही है। यदि गवाहों के बयान और डिजिटल सबूतों में तालमेल बैठता है, तो इस मामले में कई अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि कई अभिभावकों ने पेपर खरीदने के लिए आवश्यक धनराशि सीधे ऑनलाइन माध्यम से भेजी थी। कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें भुगतान पत्नी या बच्चों के बैंक खातों के माध्यम से किए गए थे। ये तमाम आर्थिक लेनदेन अब सीबीआई की जांच का केंद्रीय हिस्सा बन गए हैं। सूत्रों का कहना है कि धनराशि का एक हिस्सा सीधे प्रो. पी. वी. कुलकर्णी और शिवराज मोटेगावकर के खातों में जमा किया गया था, जिससे आर्थिक अपराध की श्रृंखला स्पष्ट होती जा रही है।
इस पूरे प्रकरण में डॉ. मनोज शिरुरे को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पूर्व में उन्हें सरकारी गवाह बनाने पर विचार किया गया था, परंतु कानूनी परामर्श और अपराध में उनकी सीधी संलिप्तता स्पष्ट होने के पश्चात सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जांच में पाया गया कि डॉ. शिरुरे ने मुख्य आरोपी प्रो. पी. वी. कुलकर्णी से प्रश्नपत्र प्राप्त कर उसे तीन छात्रों तक पहुंचाया था, जिसमें लातूर के एक कोचिंग क्लास संचालक का बेटा भी शामिल था।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की पूछताछ में शिवराज मोटेगावकर ने अपने बेटे को नीट परीक्षा से पूर्व प्रश्नपत्र मिलने की बात स्वीकार कर ली है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, किंतु जांच एजेंसियों का यह संदेह गहरा गया है कि अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए ही उन्होंने पेपर खरीदे थे। मोटेगावकर को पूर्व में मिली दस दिनों की पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में भी कई महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई का यह कदम अत्यंत निर्णायक माना जा रहा है। घर का ही सदस्य मुख्य गवाह बनने की संभावना ने शिवराज मोटेगावकर की स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। आने वाले समय में इस मामले में बड़े खुलासे होने के आसार हैं और पूरे देश की निगाहें अब सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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