लातूर में भड़का अभ्यर्थियों का आक्रोश: MPSC आयु सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर दयानंद कॉलेज के बाहर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन
लातूर के दयानंद कॉलेज गेट पर MPSC अभ्यर्थियों ने आयु सीमा में 2-3 वर्ष की वृद्धि की मांग को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया। कोरोना काल में परीक्षाओं की देरी के कारण आयु सीमा पार कर चुके छात्रों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर न्याय की गुहार लगाई और चेतावनी दी कि निर्णय न होने पर आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में उग्र होगा।

लातूर: महाराष्ट्र में 'शिक्षा की काशी' के रूप में विख्यात लातूर शहर आज एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के संघर्ष का केंद्र बन गया। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा में बैठने की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थियों ने दयानंद कॉलेज के मुख्य द्वार पर धरना देकर राज्य सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। अपनी आंखों में भविष्य के सपने और हाथों में न्याय की मांग वाली तख्तियां लिए इन युवाओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन पूरे राज्य में दावानल की तरह फैल जाएगा।
आंदोलन की शुरुआत तब हुई जब बड़ी संख्या में छात्र दयानंद कॉलेज के गेट पर जमा हुए और सरकार की वर्तमान नीतियों के प्रति अपना तीव्र असंतोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि कोरोना महामारी के दौरान परीक्षा के समय सारिणी में हुए अत्यधिक विलंब और बार-बार टलने वाली परीक्षाओं के कारण उनका कीमती समय बर्बाद हुआ है। इसके अलावा, शैक्षणिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझते हुए कई मेधावी छात्र अब सरकारी सेवा के लिए निर्धारित आयु सीमा को पार कर चुके हैं। छात्रों ने मांग की है कि सामान्य और ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को कम से कम 2 से 3 वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाए, ताकि उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने का एक अंतिम अवसर मिल सके।
प्रदर्शन के दौरान "आयु सीमा बढ़ाओ", "छात्रों पर अन्याय बंद करो" और "MPSC उम्मीदवारों को न्याय दो" जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। अपनी व्यथा सुनाते हुए आंदोलनकारियों ने कहा कि सालों की कड़ी मेहनत के बाद महज उम्र के एक तकनीकी आंकड़े की वजह से उन्हें परीक्षा से वंचित करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इस संघर्ष को कई स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और कोचिंग संस्थानों के मार्गदर्शकों का भी समर्थन प्राप्त हुआ। मार्गदर्शकों ने चेतावनी दी है कि सरकार छात्रों की पीड़ा को समझे और तत्काल सकारात्मक निर्णय ले। हालांकि, छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। प्रदर्शन के अंत में, अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने का निर्णय लिया, जिससे इस मुद्दे पर शासन का ध्यान आकर्षित किया जा सके।

Limbraj Panhalkar (Latur)
नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर
वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)
कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)
बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग
अनुभव: 20 साल
परिचय
लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
