कोल्हापुर: आज के भागदौड़ भरे युग में, जहाँ नैतिक मूल्यों का ह्रास एक चिंता का विषय बनता जा रहा है, वहाँ बच्चों के चरित्र निर्माण और संस्कारों की नींव को सुदृढ़ करने के लिए मातृभाषा में शिक्षा का महत्व सर्वोपरि है। इसी विचारधारा को रेखांकित करते हुए कोल्हापुर जिले के कागल तालुका स्थित बोरवडे की जिला परिषद प्राथमिक शाला में आयोजित 'प्रवेशोत्सव' कार्यक्रम में शिक्षा के माध्यम और संस्कारों के अटूट संबंध पर गहन मंथन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित जिला परिषद सदस्या शोभाताई फराकटे ने स्पष्ट किया कि मातृभाषा में ग्रहण की गई शिक्षा ही बालमन में संवेदनशीलता और सुयोग्य संस्कारों को प्रभावी ढंग से रोपित करने का सबसे सशक्त माध्यम है।

समारोह की अध्यक्षता शाला के मुख्याध्यापक कृष्णात पाटील ने की। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रांगण एक जीवंत उत्सव का केंद्र बन गया था। नए विद्यार्थियों के स्वागत के लिए विशेष आयोजन किए गए थे, जिसमें वाद्यवृंद की मधुर धुनें, विद्यार्थियों पर फूलों की वर्षा और पारंपरिक मिष्ठान के साथ उनका अभिनंदन किया गया। इस उत्साहपूर्ण वातावरण ने विद्यालय के प्रति बच्चों में एक सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मविश्वास का संचार किया। प्रवेशोत्सव की इस भव्यता ने न केवल छात्रों को प्रेरित किया, बल्कि अभिभावकों के मन में भी अपनी स्थानीय शिक्षण व्यवस्था के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर उपसरपंच दत्तात्रय पाटील, ग्राम पंचायत सदस्या जयश्री फराकटे, स्वप्निल फराकटे, संभाजी फराकटे, केदार फराकटे, विद्यालय व्यवस्थापन समिति की अध्यक्षा सीमा साठे, उपाध्यक्ष संदीप वारके, राजेंद्र साठे, पूर्व मुख्याध्यापक जयसिंग पाटील सहित शिक्षक नारायण वारके, शशिकांत रानमाळे, महेश गुरव, प्रशांत शिंदे, पांडुरंग ननवरे, वर्षा ननवरे, दिपाली गुरव, स्मिता परीट और प्रतिभा पाटील की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन और आभार प्रदर्शन शिक्षक नारायण वारके ने किया। विद्यालय के इस प्रवेशोत्सव ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति और संस्कारों की उस अनमोल धरोहर का वाहक है, जो मातृभाषा के माध्यम से ही अपने मूल स्वरूप में अगली पीढ़ी तक पहुंच सकती है।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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