गोंडपिपरी और कोरपना तालुका में लगातार हुई भारी बारिश, बेमौसम बरसात और प्रशासनिक नियमों के चलते महीनों से राहत से वंचित किसानों को आखिरकार राज्य सरकार से बड़ी मदद मिली है। लंबे समय से चले आ रहे विवाद और किसानों के बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार ने दोनों तालुकाओं के लिए 28 करोड़ 10 लाख रुपये की सहायता राशि मंजूर की, जिससे हजारों किसानों को नई उम्मीद मिली है।

मामला तब गंभीर हुआ जब कोरपना और गोंडपिपरी को प्रशासन ने 65 मिमी वर्षा के निर्धारित मानक से कम बारिश का हवाला देते हुए राहत सूची से बाहर कर दिया। गोंडपिपरी में 64.08 मिमी और कोरपना में 63.10 मिमी बारिश दर्ज होने के बावजूद फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। यह मुद्दा जैसे ही स्थानीय मीडिया में प्रमुखता से उभरा, क्षेत्र में असंतोष बढ़ गया और किसानों ने उचित मुआवजे की मांग तेज कर दी।

राजुरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक देवराव भोंगले ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल दखल दिया और विधानसभा में यह मुद्दा मजबूती से उठाया। उन्होंने जिला प्रशासन और कृषि विभाग को विस्तृत नुकसान का ब्यौरा सौंपा, जिसमें गोंडपिपरी के 19,676.65 हेक्टेयर और कोरपना के 13,401.12 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के नुकसान का उल्लेख किया गया। किसानों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भी राज्य सरकार के समक्ष विशेष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया और कोरपना तालुका की जटिल परिस्थिति पर ध्यान देने की मांग की।

लगातार फॉलो-अप और राजनीतिक प्रयासों के बाद जिला कलेक्टर ने डिविजनल कमिश्नर को विस्तृत प्रस्ताव भेजा। इसके बाद राज्य सरकार ने 7 दिसंबर 2025 को आधिकारिक सरकारी निर्णय जारी करते हुए दोनों तालुकाओं के 31,487 किसानों और कुल 33,077.77 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र के लिए 28.10 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर कर दी। यह राहत राशि किसानों के लिए आर्थिक संबल का कार्य करेगी और दोनों क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त कृषि व्यवस्था को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएगी।

इस फैसले ने गोंडपिपरी और कोरपना के हजारों किसानों को राहत की सांस दी है। स्थानीय नेतृत्व, विधायक भोंगले और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। यह कदम किसानों के संघर्ष को मान्यता देने और उनकी कठिनाइयों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

Next Story