मोबाइल युग में फिर खिले ‘माटी के खेल’, भारतमाता स्कूल में झिम्मा-फुगड़ी प्रतियोगिता
मोबाइल युग में बिद्री के भारतमाता स्कूल में 12 टीमों ने झिम्मा-फुगड़ी समेत पारंपरिक खेलों और लोकगीतों से मराठी संस्कृति का जागर किया।

तस्वीर में बिद्री स्थित स्कूल में पारंपरिक नऊवारी साड़ी पहनी छात्राएं नजर आ रही हैं।
नऊवारी साड़ी, माथे पर चंद्रकोर, नाक में नथ और पायल की झंकार के बीच गूंजते गौरी गीतों ने बिद्री (ता. कागल) स्थित भारतमाता हाईस्कूल का माहौल पूरी तरह मराठमोला बना दिया। गीतों की ताल पर छात्राओं ने फुगड़ी के फेर लगाए और झिम्मा-फुगड़ी प्रतियोगिता के माध्यम से पारंपरिक खेलों, लोकगीतों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।
भारतमाता हाईस्कूल, बिद्री और आचार्य जावडेकर शिक्षाशास्त्र महाविद्यालय, गारगोटी (बी.एड. अंतरवासिता चरण दो) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्घाटन जिला परिषद सदस्य श्रीमती शोभाताई गणपतराव फराकटे (काकी) के हाथों हुआ। इस अवसर पर सौ. आरती नारायण भंडारे और सौ. शिवानी राहुल भंडारे प्रमुख रूप से उपस्थित थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता सौ. एस. एस. फराकटे ने की।
प्रतियोगिता में कुल 12 टीमों ने भाग लिया। कक्षा पांचवीं से दसवीं तक की छात्राओं ने पारंपरिक नऊवारी साड़ी पहनकर उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई। मोबाइल और आधुनिक मनोरंजन के दौर में धीरे-धीरे लुप्त हो रहे पारंपरिक ग्रामीण खेलों को छात्राओं ने उत्साह और कौशल के साथ प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से नई पीढ़ी के सामने लोकपरंपराओं के महत्व को रेखांकित किया गया।
झिम्मा-फुगड़ी के साथ गौरी के गीत, काटवट कणा, सूप नचाना, घड़ा घुमाना, पारंपरिक उखाणे तथा छिया फू जैसे लुप्तप्राय पारंपरिक खेलों का भी प्रदर्शन किया गया। प्रत्येक टीम ने अपने विशिष्ट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
‘संस्कृति का जागरण करें, परंपरा की विरासत को संजोएं’ इस उद्देश्य को छात्राओं ने अपने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से सार्थक किया। इस अवसर पर मान्यवरों ने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी मिट्टी की परंपराओं, लोककलाओं और पारंपरिक खेलों से परिचित कराने के लिए ऐसे उपक्रमों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में प्रभारी मुख्याध्यापक टी. आर. पाटील, प्रा. डॉ. पी. बी. दराडे, कोजिमाशिचे विशेषज्ञ संचालक विनोद वारके, छात्र मुख्याध्यापक आकाश वारके सहित सभी शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, प्रशिक्षणार्थी छात्राध्यापक तथा विद्यार्थी-छात्राएं उपस्थित थे।
स्वागत आकाश वारके ने किया। प्रस्तावना एस. एस. माजगावकर ने रखी। संचालन धनराज आमते ने किया, जबकि आभार अमृता कोपार्डेकर ने व्यक्त किया।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
