भुदरगड तालुका के खेडगे-एरंडपे मार्ग स्थित रक्षादेवी घाट के तथाकथित 'मैग्नेटिक पॉइंट' को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही चर्चाओं पर आखिरकार विराम लग गया है। सार्वजनिक बांधकाम उपविभाग, भुदरगड के उपअभियंता महेश कांजर और उनके अधिकारी वर्ग ने घटनास्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर लेव्हल यंत्र के माध्यम से वैज्ञानिक जांच की। जांच में स्पष्ट हुआ कि संबंधित स्थान पर किसी भी प्रकार का चुंबकीय प्रभाव मौजूद नहीं है, बल्कि यह केवल दृष्टिभ्रम (ऑप्टिकल इल्यूजन/ग्रैव्हिटी हिल इफेक्ट) का परिणाम है।

सोशल मीडिया पर न्यूट्रल गियर में खड़े वाहनों के चढ़ाई की दिशा में स्वयं आगे बढ़ने के वीडियो बड़ी संख्या में वायरल होने के बाद इस स्थान को 'मैग्नेटिक पॉइंट' के नाम से पहचान मिलने लगी थी। इस घटना को लेकर अनेक नागरिकों ने अलग-अलग तर्क और अनुमान भी लगाए थे। हालांकि, सार्वजनिक बांधकाम विभाग ने वैज्ञानिक पद्धति से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने रख दी।

लेव्हल जांच के दौरान पाया गया कि जहां देखने पर सड़क चढ़ाई वाली प्रतीत होती है, वहां वास्तविकता में सड़क पर लगभग एक फुट का हल्का ढलान मौजूद है। इसी कारण न्यूट्रल में छोड़ा गया वाहन गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार ढलान की दिशा में स्वतः सरकने लगता है। आसपास की पर्वत श्रृंखलाओं, पेड़ों की संरचना तथा क्षितिज स्पष्ट दिखाई न देने के कारण वाहन के चढ़ाई की ओर बढ़ने का भ्रम उत्पन्न होता है।

उपअभियंता महेश कांजर ने बताया कि इस स्थान पर किसी भी प्रकार की चुंबकीय शक्ति सक्रिय नहीं है और यह पूरी तरह दृश्यभ्रम का मामला है। इसलिए इस स्थान को 'मैग्नेटिक पॉइंट' कहना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है।

सार्वजनिक बांधकाम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस वैज्ञानिक निष्कर्ष के बाद पिछले कई दिनों से जारी चर्चाओं पर पूर्ण विराम लग गया है। विभाग के अनुसार रक्षादेवी घाट का यह स्थल 'ग्रैव्हिटी हिल इफेक्ट' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां दृष्टिभ्रम के कारण वास्तविक ढलान चढ़ाई जैसा दिखाई देता है।

Pratahkal Bureau

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