चाकूर में गूंजा 'भारत माता की जय': देश की सरहदों को मिले 334 नए जांबाज, बीएसएफ कैंप में भव्य दीक्षांत समारोह संपन्न
चाकूर (महाराष्ट्र) स्थित STC BSF में 334 नवआरक्षकों का भव्य दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। 44 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद ये जांबाज अब भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमा पर देश की रक्षा करेंगे। महानिरीक्षक विनीत कुमार ने परेड की सलामी ली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरक्षक सिबा सुंदर, अंबर पांडे और प्रजापति भाविन समेत अन्य को सम्मानित किया। देशभक्ति के जज्बे से भरा एक संपूर्ण समाचार।

चाकूर में गूंजा 'भारत माता की जय': देश की सरहदों को मिले 334 नए जांबाज, बीएसएफ कैंप में भव्य दीक्षांत समारोह संपन्न
चाकूर, महाराष्ट्र। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए शौर्य और संकल्प का एक नया अध्याय आज महाराष्ट्र के चाकूर में लिखा गया। सहायक प्रशिक्षण केंद्र, सीमा सुरक्षा बल (STC BSF) के श्री छत्रपती शिवाजी महाराज परेड ग्राउंड पर शनिवार, 17 जनवरी 2026 को 334 नवआरक्षकों का भव्य दीक्षांत एवं शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। कड़कड़ाती धूप और देशभक्ति के जोश के बीच जब इन जवानों ने राष्ट्र सेवा की शपथ ली, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। 03 मार्च 2025 से शुरू हुआ 44 सप्ताह का बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण बुनियादी प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर ये 'शिलेदार' अब भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अपनी वीरता का परचम लहराने के लिए तैयार हैं।
समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परेड की सलामी स्वयं STC BSF चाकूर के महानिरीक्षक विनीत कुमार ने स्वीकार की। अनुशासन और सटीकता की मिसाल पेश करते हुए इस दीक्षांत परेड का नेतृत्व नवआरक्षक अंबर पांडे ने किया। महानिरीक्षक विनीत कुमार और कमांडेंट मदन पाल सिंह के कुशल मार्गदर्शन में तैयार हुई यह टुकड़ी भारत की विविधता में एकता का प्रतीक है, जिसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम, गुजरात, राजस्थान, केरल, पंजाब, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, झारखंड, मेघालय, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और दमन-दीव जैसे राज्यों के युवा शामिल हैं।
प्रशिक्षण के दौरान असाधारण कौशल दिखाने वाले जवानों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। बैच क्रमांक 193 में आरक्षक सिबा सुंदर ने 'ओवरऑल फर्स्ट' रहकर गोल्ड मेडल और ट्रॉफी पर कब्जा जमाया, जबकि आरक्षक अंबर पांडे 'ओवरऑल सेकंड' रहे। अंबर पांडे ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 'बेस्ट इन टर्नआउट व ड्रिल' और 'परेड कमांडर ट्रॉफी' भी अपने नाम की। वहीं, आरक्षक जीवन ज्योति को 'बेस्ट इन एंड्योरेंस' और आरक्षक संजय कुमार साकेत को 'बेस्ट इन फायरिंग' के खिताब से नवाजा गया। इसी तरह बैच क्रमांक 194 में आरक्षक प्रजापति भाविन ने 'ओवरऑल फर्स्ट' (गोल्ड मेडल) और आरक्षक गुलशन कुमार ने 'ओवरऑल सेकंड' (सिल्वर मेडल) स्थान प्राप्त किया। आरक्षक खैर शैलेशभाई ने एंड्योरेंस, आरक्षक गुजरिया सात्विकभाई ने फायरिंग और आरक्षक सौमेंद्र महापात्र ने टर्नआउट व ड्रिल में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की।
इन 44 हफ्तों के दौरान इन नवआरक्षकों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी फौलाद बनाया गया है। प्रशिक्षण में उन्हें आधुनिक हथियारों का संचालन, फील्ड क्राफ्ट, मानचित्र अध्ययन, फील्ड इंजीनियरिंग, आंतरिक सुरक्षा के कर्तव्य, सीमा प्रबंधन के गुर और मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशीलता का गहन पाठ पढ़ाया गया है। संबोधन के दौरान महानिरीक्षक विनीत कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि ये जवान भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश की संवेदनशील सीमाओं पर देश की ढाल बनेंगे। उन्होंने उन गौरवान्वित माता-पिता का विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़ों को राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। समारोह का समापन मलखंभ के साहसी प्रदर्शन और देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसने उपस्थित अतिथियों और स्कूली बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Pratahkal Bureau
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