कोल्हापुर के कागल तालुका स्थित बानगे गांव में वेदगंगा नदी की बाढ़ से हर वर्ष विस्थापन का सामना करने वाले बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के मुद्दे पर जिलाधिकारी डॉ. विजय राठोड की सकारात्मक भूमिका से लंबे समय से वैकल्पिक भूमि की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

बानगे के बाढ़ प्रभावित परिवार पिछले लगभग 25 वर्षों से पुनर्वास के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की मांग को लेकर शासन और प्रशासन के समक्ष लगातार प्रयास कर रहे हैं। कई बार ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद मामला लंबित रहने पर हाल ही में बाढ़ प्रभावितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी डॉ. विजय राठोड से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान जिलाधिकारी ने पुनर्वास के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के संबंध में सकारात्मक भूमिका अपनाई। इसकी जानकारी सरपंच सुनील बोंगार्डे और पूर्व उपसरपंच रमेश सावंत ने दी।

वेदगंगा नदी में बाढ़ आने पर बानगे गांव की आंबी गली, परीट गली और भोपळे गली क्षेत्र के नागरिकों को हर वर्ष सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होना पड़ता है। कुछ परिवार वैकल्पिक स्थान तलाशकर स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, लेकिन अभी भी लगभग 31 परिवार पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनके सामने बेघर होने की स्थिति बनी हुई है।

इन परिवारों के पुनर्वास के लिए गायरान क्षेत्र के गट क्रमांक 746 में भूमि की माप पूरी हो चुकी है। यहां भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। बाढ़ प्रभावितों ने जिलाधिकारी से इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दिलाकर पुनर्वास प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की।

इस अवसर पर सरपंच सुनील बोंगार्डे, पूर्व उपसरपंच रमेश सावंत, पांडुरंग आंबी, वसंत नाटकुळे, सुरेश सुतार, मारुती परीट, विजयमाला आंबी, कल्पना चोपडे सहित बाढ़ प्रभावित नागरिक उपस्थित रहे।

बानगे के बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में प्रशासन की सकारात्मक पहल से करीब 25 वर्षों से लंबित इस मामले के समाधान की उम्मीद तेज हो गई है। अब पुनर्वास के लिए लंबित प्रस्ताव पर शासन के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

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