धुळे: मंत्री डॉ. अशोक उईके ने खाज्या नायक शौर्य स्मृति दिवस पर दी श्रद्धांजलि
आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने शिरपूर के बाटवापाडा में क्रांतिकारी खाज्या नायक को नमन किया, तीन दिवसीय स्मृति कलश यात्रा का हुआ समापन।

महाराष्ट्र के धुळे जिले की शिरपूर तहसील अंतर्गत, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर सातपुड़ा पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित ऐतिहासिक बाटवापाडा की भूमि 11 अप्रैल को शौर्य और स्वाभिमान की साक्षी बनी। महान आदिवासी क्रांतिकारी खाज्या नायक के 'शौर्य स्मृति दिवस' के अवसर पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने उस समय ऐतिहासिक स्वरूप धारण कर लिया, जब महाराष्ट्र शासन के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने पहली बार इस पवित्र स्मारक स्थल पर अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई। 1800 के दशक में ब्रिटिश दमनकारी सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह का शंखनाद करने वाले और सातपुड़ा के वनांचल में स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले अमर सेनानी खाज्या नायक को मंत्री महोदय ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस गौरवशाली दिवस की पूर्व संध्या पर 9 से 11 अप्रैल तक धरणगाव, चोपड़ा और शिरपूर तहसील से होते हुए अंबापाणी तक निकली तीन दिवसीय 'खाज्याजी नायक स्मृति कलश यात्रा' ने क्षेत्र के वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया, जिससे मुख्य आयोजन की भव्यता और अधिक बढ़ गई।
मंत्री डॉ. अशोक उईके की उपस्थिति में खाज्या नायक के स्मारक, मंदिर और परिसर स्थित ऐतिहासिक गुफा में विशेष दर्शन एवं पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान बाटवापाडा में आदिवासी बंधुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिन्होंने इसी परिसर में मातृभूमि की रक्षा के लिए लड़ते-लड़ते वीरगति प्राप्त करने वाले अपने महानायक के अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण भव्य पारंपरिक वाद्य प्रतियोगिता रही, जिसमें समूचे शिरपूर तहसील के सीमावर्ती क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृति का प्रदर्शन कर पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया। यह पहला ऐतिहासिक अवसर था जब किसी आदिवासी विकास मंत्री ने स्वयं इस दुर्गम एवं ऐतिहासिक स्थल पर भेंट दी, जिससे संपूर्ण आदिवासी समुदाय के भीतर स्वाभिमान, हर्ष और गौरव की नई लहर दौड़ गई है। यह आयोजन न केवल एक वीर का स्मरण था, बल्कि सातपुड़ा की वादियों में आज भी जीवित उस क्रांतिकारी चेतना का जीवंत प्रमाण था जिसने कभी अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी।

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