कोल्हापूर: विजय मोरबाळे

शारीरिक चोट, डॉक्टरों द्वारा कुश्ती छोड़ने की सलाह और विपरीत परिस्थितियों को चुनौती देते हुए मुरगुड स्थित लोकनेते सदाशिवराव मंडलिक राष्ट्रीय (SAI) कुश्ती संकुल की पहलवान अंजली संतोष वेताळ ने थाईलैंड के पटाया में आयोजित 15 वर्ष से कम आयु वर्ग की एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल मुरगुड बल्कि पूरे कोल्हापूर जिले को गौरवान्वित किया है।

हिंदकेसरी पै. संतोष (आबा) वेताळ की सुपुत्री अंजली ने बचपन से ही अपने पिता की कुश्ती विरासत को आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने का सपना संजोया था। हालांकि, दो वर्ष पूर्व प्रशिक्षण के दौरान उसे गंभीर चोट का सामना करना पड़ा। चोट की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे कुश्ती से संन्यास लेने की सलाह दी थी। इसके बावजूद अंजली की कुश्ती के प्रति ललक और देश के लिए पदक जीतने का संकल्प अडिग रहा।

बेटी का दृढ़ निश्चय देखकर पिता पै. संतोष वेताळ ने मंडलिक कुश्ती संकुल के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक दादासो लवटे से परामर्श किया। अंजली के सपनों को पहचानते हुए कोच दादासो लवटे ने उसे पुनः अखाड़े में उतारने का कठिन निर्णय लिया। चोट से उबरते हुए उसे विशेष और कठोर प्रशिक्षण दिया गया। गुरु और शिष्या की इस अथक मेहनत का परिणाम थाईलैंड की धरती पर फलीभूत हुआ, जहां अंजली ने कांस्य पदक जीतकर अपने संघर्ष को सफलता में परिवर्तित किया।

अंजली की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मंडलिक कुश्ती संकुल के प्रमुख एवं पूर्व सांसद संजयदादा मंडलिक, कार्याध्यक्ष ॲड. विरेंद्र भैय्या मंडलिक, राज्य उत्पादन शुल्क विभाग के सहआयुक्त सुनील चव्हाण, एसएआई (SAI) के पूर्व राज्य समन्वयक चंद्रकांत चव्हाण और डॉ. प्रशांत अथणी ने उसे बधाई देते हुए आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। अंजली वेताळ की यह यशोगाथा इस बात का प्रेरणादायी उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, चिकाटी, उचित मार्गदर्शन और कठोर परिश्रम के बल पर किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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