महिला नेतृत्व और संघर्ष की मिसाल: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लेडी अफसरों की 'शक्ति' गाथा!
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 पर पेश हैं प्रेरक कहानियाँ, जिन्होंने संघर्ष और समर्पण से सफलता पाई। महावितरण, नगर पालिका और MHADA में कार्यरत महिलाओं ने अवसर, शिक्षा और आत्मविश्वास से समाज में बदलाव लाया। महिलाओं के सशक्तिकरण और नेतृत्व की मिसालें।

कहते हैं कि एक महिला की सफलता के पीछे उसका कभी न हार मानने वाला जज्बा होता है। घर की जिम्मेदारियों से लेकर सरकारी फाइलों और जनसंपर्क की चुनौतियों तक, इन महिलाओं ने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। 8 मार्च 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' के उपलक्ष्य में, हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ ऐसी विशेष कहानियाँ, जो हमें सिखाती हैं कि अवसर और विश्वास मिलने पर महिलाएँ पूरे समाज का भविष्य बदल सकती हैं। म्हाडा से लेकर महावितरण और विभिन्न नगर पालिकाओं में कार्यरत इन अधिकारियों के विचार आपको संघर्ष से सफलता की नई राह दिखाएंगे।
किमया पवार-शिरगावकर, कर निर्धारण एवं प्रशासनिक अधिकारी अंबरनाथ नगर परिषद
"मैंने बी.एससी. (केमिस्ट्री) की पढ़ाई पूरी की, लेकिन उसी वर्ष पिता को पैरालिसिस होने से परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई और मुझे आगे की पढ़ाई छोड़कर नौकरी करनी पड़ी। अस्थायी नौकरियों के बीच भी मन में एक ही सपना था, ‘एक दिन अपनी हक़ की कुर्सी हासिल करनी है।’
विवाह के बाद पति के सहयोग से मैंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह MPSC की तैयारी की और चार वर्षों की निरंतर मेहनत के बाद एक साथ चार पदों में चयन हुआ। आज मैं महिला एवं बाल कल्याण, शिक्षा तथा सूचना एवं जनसंपर्क जैसे तीन विभागों का कार्यभार संभाल रही हूँ।
महिलाओं के सशक्तिकरण और विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षा, विशेषकर AI और Robotics की शुरुआत करना मेरा लक्ष्य है। मेरा मानना है — जब सपने बड़े हों, तो परिस्थितियाँ छोटी पड़ जाती हैं।" : किमया पवार
ममता पांड्ये - जनसंपर्क अधिकारी, महावितरण भांडुप
‘मैं हमेशा से दृढ़ निश्चयी और महत्वाकांक्षी रही हूँ और जीवन में हर बाधा को तोड़कर आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है। पोद्दार स्कूल से लेकर श्रीम चान्दिबाई मनसुखानी कॉलेज और बाद में MGM कॉलेज, छ. संभाजीनगर तक, मैंने सीखने के अपने जुनून को लगातार आगे बढ़ाया। मेरे लिए सफलता का अर्थ है लगातार सीखते रहना और हर चुनौती को अवसर में बदलना। शिक्षा और मेहनत ने मेरे जीवन की दिशा तय की और मुझे आगे बढ़ने की ताकत दी। आज महावितरण में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में काम करते हुए समाज और लोगों से जुड़कर कार्य करने का अवसर मिल रहा है।
मेरा मानना है कि अगर महिलाओं को परिवार और समाज का विश्वास व सहयोग मिले, तो वे हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। शिक्षा, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी महिलाओं को आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देना चाहती हूँ।” : ममता पांड्ये
रेश्मा आरोटे, जनसंपर्क अधिकारी ठाणे जिला परिषद
"मेरा जीवन संघर्षों के बीच शुरू हुआ, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों ने मुझे मजबूत बनाया और बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार के संस्कार, शिक्षा और स्वयं पर विश्वास ने मेरे सफर को सही दिशा दी। जनसंपर्क क्षेत्र में काम करते हुए मैंने यह महसूस किया कि यह केवल प्रचार नहीं, बल्कि प्रशासन और नागरिकों के बीच विश्वास का सेतु बनाने की जिम्मेदारी है। हर दिन नई चुनौतियां आती हैं, लेकिन टीमवर्क, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हर कठिनाई को अवसर में बदला जा सकता है। एक महिला के रूप में कार्य और परिवार के बीच संतुलन चुनौतीपूर्ण होता है, पर यही हमारी क्षमता और शक्ति को भी दर्शाता है। मेरा मानना है कि संघर्ष बाधा नहीं, बल्कि हमारी क्षमता को पहचानने का अवसर है। जिद, ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ कोई भी महिला अपनी अलग पहचान बना सकती है और सफलता हासिल कर सकती है।" :रेश्मा आरोटे
वर्षा कुलकर्णी, जनसंपर्क अधिकारी पनवेल महानगर पालिका
'चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत अनुसार जीवन में अस्तित्व के लिए संघर्ष हर किसी को करना पड़ता है, और महिलाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। खुद को साबित करने के रास्ते में कई बाधाएं आती हैं और हर बार प्रोत्साहन मिले, यह भी जरूरी नहीं होता। लेकिन जो महिलाएं हिम्मत, धैर्य और निरंतर प्रयास से इन चुनौतियों को पार करना सीख लेती हैं, वही सफलता हासिल करती हैं।
मेरे जीवन में भी कई कठिनाइयाँ आईं, लेकिन जिद और आत्मविश्वास के बल पर मैं आगे बढ़ती रही। मेरा मानना है कि हर महिला को अपनी यात्रा स्वयं तय करनी होती है। कोई साथ दे या न दे, यदि मन में दृढ़ संकल्प हो और कदम लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें, तो सफलता निश्चित मिलती है। सभी महिलाओं को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।” : वर्षा कुलकर्णी
प्राची प्रशांत डिंगणकर, उपमाहिती एवं जनसंपर्क अधिकारी - ठाणे महानगरपालिका
“मेरी यात्रा पत्रकारिता से शुरू होकर आज प्रशासनिक सेवा तक पहुँची है, जहाँ समाज और नागरिकों से जुड़कर काम करने का अवसर मिला। K. J. Somaiya College of Arts and Commerce और St. Xavier’s College Mumbai से शिक्षा और पत्रकारिता प्रशिक्षण ने मेरे करियर की मजबूत नींव रखी। विभिन्न समाचार पत्रों में काम करने से समाज और प्रशासन को समझने का व्यापक अनुभव मिला।
8 मार्च को मनाया जाने वाला आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस इस वर्ष ‘Give to Gain’ की सार्थक संकल्पना के साथ हमें यह संदेश देता है कि जब महिलाओं को अवसर, विश्वास और समानता मिलती है, तो उसका लाभ पूरे समाज को मिलता है।
म्हाडा केवल घर बनाने वाली संस्था नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक आवास व्यवस्था देने के लिए कार्यरत है। इस कार्य में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। संस्था में लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएँ हैं, जो प्रशासन, तकनीकी सेवा, योजना और परियोजना कार्यों में सक्रिय योगदान दे रही हैं। मेरा मानना है कि महिलाओं को अवसर और प्रोत्साहन देना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक प्रगतिशील और समृद्ध समाज निर्माण की कुंजी है।
“Give to Gain” की संकल्पना के अनुसार महिलाओं को अधिक अवसर, समानता और प्रोत्साहन देना केवल सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि एक उज्ज्वल और प्रगतिशील भविष्य के निर्माण की कुंजी है। महिलाओं के सशक्तिकरण और समान अधिकारों को मजबूत बनाने का संकल्प लेते हुए… आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी महिलाओं को हार्दिक शुभकामनाएँ। :वैशाली गडपाले - मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, MHADA

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
