शिक्षा के गिरते स्तर और खस्ताहाल सरकारी इमारतों के बीच अमरावती जिले से उम्मीद की एक नई किरण उभरी है। जिले में मराठी माध्यम के स्कूलों की जर्जर अवस्था और बदहाली को देखते हुए हिवरखेड के निवासी एक शिक्षित युवा, रिनीत भुक्ते ने शिक्षा के मंदिर को बचाने हेतु जंग का बिगुल फूंक दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की उपेक्षा समाज के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रही थी, जिसे देखते हुए रिनीत ने अपनी शिक्षा को व्यक्तिगत लाभ के बजाय समाज सेवा में झोंकने का पक्का निर्धारण किया है।

इस ध्येय को धरातल पर उतारने के लिए रिनीत भुक्ते ने गांव के युवाओं को संगठित कर हिवरखेड में 'लोकशाही कार्यालय' की स्थापना की है। यह केंद्र न केवल शिक्षा, बल्कि आम जनता की समस्याओं के समाधान का केंद्र बिंदु बनेगा। गौरतलब है कि बिना किसी राजनीतिक संरक्षण या बड़े पाठबल के, रिनीत ने इससे पूर्व भी कास्तकारों, दिव्यांगों और आम नागरिकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रखर आंदोलन किए हैं और उनका सफलतापूर्वक निराकरण भी कराया है।

वर्तमान में जिले के कई मराठी स्कूलों की हालत चिंताजनक है, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। रिनीत भुक्ते और उनके युवा संगठन ने शपथ ली है कि वे मराठी स्कूलों के अस्तित्व को मिटने नहीं देंगे और प्रशासन को इनके कायाकल्प के लिए विवश करेंगे। समाजसेवा का यह कारवां अब एक व्यवस्थित रूप ले चुका है, जहां लोकशाही कार्यालय के माध्यम से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढुलमुल नीति के विरुद्ध आवाज बुलंद की जाएगी। यह पहल यह दर्शाती है कि यदि युवा नेतृत्व निस्वार्थ भावना से मैदान में उतरे, तो बिना किसी सत्ता के भी व्यवस्था में परिवर्तन लाया जा सकता है।

Pratahkal Bureau

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