अमरावती जिले के मोर्शी तहसील अंतर्गत विचोरी गांव में प्रकृति का कहर किसानों पर भारी पड़ गया है। मानसून के आगमन में पहले ही देरी के कारण चिंतित अन्नदाताओं ने जैसे ही अपने खेतों में सोयाबीन की बुवाई की, वैसे ही भीषण बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 29 और 30 जून को हुई मूसलाधार बारिश ने न केवल खेतों में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी, बल्कि अभी-अभी बोए गए सोयाबीन के बीज भी पूरी तरह से सड़कर नष्ट हो गए हैं। इस आपदा ने क्षेत्र के किसानों को एक बार फिर से आर्थिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिससे अब उन्हें दोबारा बुवाई करने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

इस प्राकृतिक आपदा के कारण विचोरी गांव के किसान गहरे सदमे में हैं। किसानों का कहना है कि पहले से ही बुवाई में देरी होने के कारण वे काफी तनाव में थे, और अब बीज के नष्ट हो जाने से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। फसल बर्बादी के साथ-साथ क्षेत्र के किसान जंगली जानवरों के बढ़ते उपद्रव से भी त्रस्त हैं, जिसने उनकी चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है। संकट की इस घड़ी में, विचोरी गांव के निवासी संजय जावरकर सहित अन्य प्रभावित किसानों ने तत्काल प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

किसानों ने मंडल कृषि अधिकारी से मांग की है कि वे त्वरित प्रभाव से प्रभावित खेतों का दौरा करें और नुकसान का पंचनामा तैयार करें। किसानों का स्पष्ट कहना है कि फसल पूरी तरह नष्ट होने के कारण उन्हें दोबारा बुवाई के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है, जिसके लिए उन्हें सरकारी मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है। यह घटना न केवल विचोरी के किसानों की आजीविका पर प्रहार है, बल्कि यह क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा झटका है। फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हैं कि वे इस विकट स्थिति में किसानों के घावों पर मरहम लगाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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