लातूर: अमावस्या के पवित्र अवसर ने मराठवाड़ा के गांवों में खुशियों की लहर दौड़ा दी है। इस अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग परंपरागत तरीके से खेतों में वनभोजन का आयोजन कर रहे हैं, जो सदियों से चली आ रही प्रथा का प्रतीक है।

शहर के रास्ते लगभग सुनसान दिखाई दिए, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग गांवों की ओर रवान हुए। विशेष रूप से लातूर में अध्ययनरत विद्यार्थी, जो शिक्षा के लिए शहर में रहते हैं, इस पर्व के अवसर पर घर लौटकर अपने परिवार और खेतों की यादों में खो गए। लातूर के केंद्रीय बस स्टेशन पर सुबह से ही भीड़ जुटी रही, जहां ग्रामीणों और विद्यार्थियों की संख्या अत्यधिक बढ़ गई।

छात्र और परिवार वाले इस दिन का आनंद इस सोच के साथ लेते हैं कि उन्हें "मां के हाथ की ताजी खेत की रोटियां खाने का अवसर मिलेगा और गांववालों के साथ हंसी-खुशी के पल बिताए जा सकेंगे।" इस त्योहार का महत्व केवल पारिवारिक मेल-जोल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसान परिवारों को एक साथ लाने और स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का भी अवसर प्रदान करता है।

खेतों की हरी-भरी फसल, मिट्टी की खुशबू और परिवार के साथ बिताए गए हास्य और खेल के पल मराठवाड़ा की सांस्कृतिक पहचान को उजागर करते हैं। इस वर्ष भी अमावस्या का पर्व अपने परंपरागत उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। शहर में रहने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर उत्सव की चमक इस अवसर के महत्व और सांस्कृतिक गहराई की पुष्टि करती है।

Pratahkal Newsroom

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