Maharashtra Municipal Election : महाराष्ट्र की राजनीति इस समय एक अभूतपूर्व मोड़ पर खड़ी है, जहाँ सत्ता के समीकरणों और वैचारिक निष्ठाओं के बीच की रेखाएँ धुंधली होती जा रही हैं। शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को पुणे में एक प्रेस वार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार ने समकालीन राजनीति में गिरते नैतिक मूल्यों और वैचारिक प्रतिबद्धता की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनके संबोधन ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आगामी महानगरपालिका चुनावों से पहले राज्य की सत्ताधारी महायुति गठबंधन के भीतर जारी आंतरिक खींचतान को भी सार्वजनिक पटल पर ला दिया है। अजित पवार ने आरोप लगाया कि आज की राजनीति सिद्धांतों के बजाय प्रलोभन, जांच एजेंसियों के दबाव और धन-बाहुबल के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है।

अजित पवार के तीखे हमलों का केंद्र मुख्य रूप से पुणे और पिंपरी-चिंचवड का स्थानीय भाजपा नेतृत्व रहा। राज्य स्तर पर भाजपा के साथ सत्ता साझा करने के बावजूद, पवार ने स्थानीय स्तर पर उनके कामकाज और 'दूरदर्शिता की कमी' पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 1992 से 2017 तक जब पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका (PCMC) एनसीपी के नियंत्रण में थी, तब यह एशिया का सबसे समृद्ध नगर निकाय बना था और उस समय ऋण लेने या बॉण्ड जारी करने की आवश्यकता नहीं पड़ी थी। इसके विपरीत, 2017 से 2022 के बीच भाजपा के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन ने नगर निकायों को संकट में धकेल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर विकास कार्य नदारद हैं और पुणे में लगाए गए 70 प्रतिशत सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हैं।

राजनीति के बदलते स्वरूप पर प्रहार करते हुए उपमुख्यमंत्री ने सर्वेक्षणों (सर्वे) के नए चलन की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अब उम्मीदवारों की लोकप्रियता आंकने के लिए सर्वे का सहारा लिया जाता है और यदि कोई विपक्षी नेता लोकप्रिय पाया जाता है, तो उसे साम, दाम, दंड, भेद के जरिए अपने पाले में लाने का प्रयास किया जाता है। यशवंतराव चव्हाण की उदारवादी राजनीति का स्मरण करते हुए पवार ने वर्तमान परिदृश्य में बढ़ती 'बदले की राजनीति' को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। स्थानीय चुनावों में शरद पवार गुट के साथ हुए अप्रत्याशित गठबंधन पर सफाई देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई पूर्व नियोजित रणनीति नहीं थी, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं और चुनावी लाभ को देखते हुए लिया गया एक तात्कालिक निर्णय था। उन्होंने दोनों गुटों के विलय की अटकलों को फिलहाल सिरे से खारिज कर दिया।

15 जनवरी 2026 को होने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव महाराष्ट्र की भावी राजनीति की दिशा तय करेंगे। अजित पवार का यह रुख स्पष्ट करता है कि स्थानीय मुद्दों और वर्चस्व की लड़ाई में अब गठबंधन की मर्यादाएं गौण हो चुकी हैं। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और वैचारिक मतभेदों के बीच होने वाला यह मतदान केवल नगर निकायों के भविष्य का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि विकास के दावों और राजनीतिक शुचिता की इस जंग में जनता किस पर भरोसा जताती है। 16 जनवरी को होने वाली मतगणना के नतीजे राज्य के राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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