राज्य सरकार की 'अहिल्याबाई होळकर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना' को लेकर शिरपुर के तऱ्हाडी से नई मांग उठी है। ग्राम निष्ठा संघर्ष समिति के संस्थापक अध्यक्ष भूषण माधव बागुल ने कहा है कि समय पर कर्ज चुकाने वाले नियमित किसानों को भी दो लाख रुपये का आर्थिक परतावा या अनुदान दिया जाना चाहिए।

तस्वीर में शिरपुर तहसील के तऱ्हाडी स्थित ग्राम निष्ठा संघर्ष समिति के संस्थापक अध्यक्ष भूषण माधव बागुल दिखाई दे रहे हैं।
शिरपुर (प्रतिनिधि): राज्य सरकार द्वारा घोषित 'अहिल्याबाई होळकर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना' को लेकर राज्यभर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बकाया कृषि ऋण वाले किसानों को दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी देने के फैसले का स्वागत किया जा रहा है, लेकिन वर्षों से ईमानदारी और समय पर ऋण चुकाने वाले नियमित किसानों के साथ इस नीति के कारण अन्याय होने की भावना भी तेज हो गई है।
इसी मुद्दे को लेकर शिरपुर तहसील के तऱ्हाडी स्थित 'ग्राम निष्ठा संघर्ष समिति' के संस्थापक अध्यक्ष भूषण माधव बागुल ने मांग की है कि बकाया ऋण वाले किसानों की तरह नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को भी कम से कम दो लाख रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक अनुदान या परतावा (रिफंड) दिया जाए।
इस संबंध में जारी अपने बयान में भूषण माधव बागुल ने राज्य सरकार की नीति पर सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रत्येक कर्जमाफी योजना में लगातार बकाया ऋण रखने वाले किसानों को बड़ा लाभ दिया जाता है, जबकि बिना किसी बहाने के समय पर ऋण चुकाकर बैंकों और सेवा संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखने वाले किसानों को केवल सीमित प्रोत्साहन देकर उनके साथ दोयम व्यवहार किया जाता है।
भूषण माधव बागुल ने कहा कि आर्थिक अनुशासन का पालन करने वाले किसान ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी संस्थाओं की रीढ़ हैं। इसके बावजूद हर बार कर्जमाफी का लाभ केवल बकायादार किसानों तक सीमित रहने से नियमित किसानों में यह भावना पैदा हो रही है कि उन्हें अपनी ईमानदारी और समय पर भुगतान करने की "सजा" मिल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन अनुदान वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। खाद, बीज, दवाइयों, मजदूरी और सिंचाई की लागत में भारी वृद्धि हो चुकी है। इसके साथ ही प्रकृति का साथ नहीं मिलने से किसान पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में 50 हजार रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
भूषण माधव बागुल ने सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा, "यदि बकाया ऋण वाले किसानों को दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी दी जा रही है, तो ईमानदारी से कर्ज चुकाने वाले किसानों को भी समान न्याय के आधार पर दो लाख रुपये का परतावा मिलना ही चाहिए। आर्थिक अनुशासन बनाए रखने वाले किसानों का सम्मान करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। यदि सरकार ने इस नीति में तत्काल संतुलन स्थापित नहीं किया, तो ग्रामीण क्षेत्रों के नियमित कर्जदार किसानों में व्यापक असंतोष फैलने की आशंका है।"

