चंद्रपूर: इस वर्ष की खरीफ फसल में सोयाबीन ने किसानों को निराश किया, और अब कपास की फसल पर बोंडअळी के हमले ने स्थिति और गंभीर कर दी है। शेतकऱों की उम्मीदें कपास से अच्छे उत्पादन की थीं, लेकिन नतीजे विपरीत रहे। न सिर्फ फसल में भारी गिरावट आई, बल्कि बोंडअळी के हमले के कारण नुकसान और बढ़ गया है, जिससे किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं और उन्हें राहत की कोई राह दिखाई नहीं दे रही है।

खरीफ सीजन में किसानों ने सोयाबीन और कपास की खेती की थी। लेकिन इस वर्ष अत्यधिक वर्षा और अनियमित मौसम की वजह से सोयाबीन की पैदावार बेहद कम रही। साथ ही, येलो मोज़ैंक और चारकोल रॉट जैसी बीमारियों ने फसल को बुरी तरह प्रभावित किया। अत्यल्प सोयाबीन उत्पादन ने पहले ही किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया था।

कपास की फसल में भी हालात बेहतर नहीं रहे। मौसम और अतिवर्षा के कारण बोंड कम और पाल ज्यादा दिखे। शुरुआती उम्मीदें थी कि कम से कम कुछ उत्पादन तो मिलेगा, लेकिन हाल के पंद्रह दिनों में बोंडअळी ने बचे हुए बोंड पर हमला किया, जिससे आधे से अधिक बोंड खराब हो गए। कुछ बोंड तो पूरी तरह से निष्फल हो गए, जिससे फसल की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई हैं।

शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने बताया कि आधी से अधिक बोंड क्षतिग्रस्त होने के कारण कपास की कीमतों पर भी असर पड़ा है। स्थानीय बाजार में कपास का भाव सामान्य से कम है और सरकारी खरीद के जटिल नियमों के कारण किसानों को सहूलियत नहीं मिल पा रही है।

धानोली के किसान विवेक रणदिवे ने कहा कि प्रारंभ में कपास की फसल अच्छी दिख रही थी, लेकिन अगस्त-सितंबर की अतिवर्षा के कारण बोंडधारण नहीं हो सकी। बची हुई बोंड पर बोंडअळी ने हमला किया, जिससे उत्पादन में भारी कमी आई। कोरपना के संकेत धगडी और माथा के संजय सोयाम ने भी कहा कि अब तक प्रति डेढ़ एकड़ फसल से मात्र तीन क्विंटल कपास प्राप्त हुआ है, जबकि लाल्या रोग और बोंडअळी के हमले ने नुकसान और बढ़ा दिया है।

किसानों का कहना है कि इस परिस्थिति में न केवल उत्पादन घटा है, बल्कि फसल का बाजार मूल्य भी संतोषजनक नहीं है। वर्षभर के परिवारिक खर्च और गुजारा मुश्किल में पड़ गया है।

यह स्थिति किसानों के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रही है, और इस वर्ष की खरीफ फसल को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

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