लातूर में आयोजित पत्रकार परिषद में महाराष्ट्र शासन पुरस्कार प्राप्त महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष और शिवसेना (शिंदे गुट) के राज्य समन्वयक अ‍ॅड. वैजनाथ वाघमारे ने बताया कि विभिन्न शासनमान्य पुरस्कार विजेताओं की लंबित और प्रमुख मांगों को लेकर 13 दिसंबर 2025 को नागपुर विधानभवन पर विशाल मोर्चा निकाला जाएगा। वर्षों से उपेक्षित इन पुरस्कार विजेताओं ने सम्मान जरूर पाया, पर सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है।

उन्होंने बताया कि सामाजिक न्याय विभाग की ओर से दिए जाने वाले डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पुरस्कार, साहित्यसम्राट अण्णाभाऊ साठे पुरस्कार, संत रोहिदास पुरस्कार, दादासाहेब गायकवाड पुरस्कार सहित कई महत्वपूर्ण सम्मान पिछले तीन से चार दशकों के दौरान विजेताओं को केवल प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित करते रहे हैं, जबकि समाज में महापुरुषों के विचारों को गांव-गांव पहुंचाने में इन व्यक्तियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। बावजूद इसके, उन्हें न तो कोई सुविधा मिली और न ही सरकारी स्तर पर कोई औपचारिक मान्यता, जिससे असंतोष गहराता गया।

अ‍ॅड. वाघमारे ने बताया कि पुरस्कार विजेताओं की प्रमुख मांगों में मासिक मानधन, मंत्रालय में प्रवेश के लिए विशेष पास, एसटी बसों में पुरस्कार विजेताओं व उनकी पत्नियों को नि:शुल्क यात्रा, तथा विशेष कार्यकारी अधिकारी पद जैसा पहचानपत्र शामिल है। उनका कहना था कि वर्षों से लंबित इन मांगों को अब सरकार के समक्ष निर्णायक रूप से रखा जाएगा।

मोर्चा सुबह 11 बजे नागपुर के यशवंत स्टेडियम से शुरू होकर मॉरिस कॉलेज तक निकाला जाएगा। यदि इसके बाद भी सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो सभी पुरस्कार विजेता अपने-अपने पुरस्कार सरकार को वापस करने का निर्णय करेंगे। इस घोषणा ने आंदोलन की गंभीरता और व्यापकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

अ‍ॅड. वाघमारे ने यह भी बताया कि जल्द ही वाशीम में राज्यस्तरीय मेळावा आयोजित किया जाएगा, जिसमें व्यापक चर्चा के साथ आगे की रणनीति तय की जाएगी और शासन से मांगें पूरी कराने की दिशा में प्रयास तेज किए जाएंगे। प्रेस वार्ता में व्यंकटराव शिंदे, बालाजी गोटमुकले, शेषेराव करकेलीकर, प्रकाश घादगिने, रमेश जोंधळे सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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