साखरी में भक्तिमय माहौल के बीच स्व. काशीनाथ पाटील गोरे को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि: उमड़ा संतों और गणमान्य हस्तियों का सैलाब
साखरी (राजुरा) में स्व. काशीनाथ पाटील गोरे की श्रद्धांजलि सभा में संतों का ताँता लगा। पूर्व विधायक सुदर्शन निमकर और ह.भ.प. माणिक महाराज की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में कीर्तन के माध्यम से 'कीर्ति रूपे उरावे' का संदेश दिया गया। इस समाचार में जानें कैसे एक शोक सभा आध्यात्मिक समागम में बदल गई और किन गणमान्य हस्तियों ने दी भावभीनी विदाई।

साखरी (राजुरा): चंद्रपुर जिले की राजुरा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम साखरी में एक आध्यात्मिक और भावुक वातावरण के बीच प्रतिष्ठित व्यक्तित्व स्व. काशीनाथ पाटील गोरे की 'गंगापूजन' एवं श्रद्धांजलि सभा संपन्न हुई। यह अवसर केवल एक शोक सभा तक सीमित न रहकर एक विशाल 'संत समागम' में तब्दील हो गया, जहाँ क्षेत्र की तमाम आध्यात्मिक और सामाजिक विभूतियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से पूर्व विधायक तथा बैंक निदेशक सुदर्शन निमकर उपस्थित थे, जिन्होंने दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
साखरी के सार्वजनिक, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में सदैव सक्रिय रहने वाले स्व. काशीनाथ पाटील गोरे, प्रसिद्ध ह.भ.प. माणिक महाराज रोकडे के अनन्य शिष्य थे। उनके गंगापूजन के इस पवित्र अवसर पर ह.भ.प. माणिक महाराज ने अपने प्रबोधनपर कीर्तन के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। उन्होंने समर्थ रामदास स्वामी के सुप्रसिद्ध दोहे "मरावे परी कीर्ती रूपे उरावे" का गहरा और अर्थपूर्ण विश्लेषण करते हुए बताया कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, किंतु उसके द्वारा किए गए परोपकारी कार्य और उसका व्यक्तित्व समाज में सदैव जीवित रहता है। उन्होंने स्व. गोरे के जीवन को इसी सिद्धांत का प्रतिबिंब बताया।
इस गरिमामय कार्यक्रम में आध्यात्मिक जगत की नामचीन हस्तियों की उपस्थिति ने वातावरण को पावन बना दिया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में गोहोकार महाराज, तुंबळे महाराज, राऊत महाराज, गोरे महाराज, लांडे महाराज और चतुरकर महाराज जैसे संतों का समावेश था। इनके साथ ही स्व. काशीनाथ पाटील के प्रशंसक केशव ठाकरे गुरुजी, एड. प्रशांत घरोटे तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की महत्ता को बढ़ाया। बड़ी संख्या में आए ग्रामीणों, परिजनों और शुभचिंतकों ने अश्रुपूरित नेत्रों से अपने प्रिय व्यक्तित्व को नमन किया। यह सभा न केवल एक व्यक्ति को विदाई देने का माध्यम बनी, बल्कि इसने साखरी क्षेत्र में स्व. काशीनाथ पाटील गोरे के प्रभाव और उनके प्रति जनता के अगाध प्रेम को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।

Pratahkal Bureau
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