लातूर। महाराष्ट्र के लातूर में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के संकल्प के साथ तैनात लातूर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुणे की सड़कों को खून से लाल कर कानून की आंखों में धूल झोंककर फरार हुए पांच खूंखार आरोपियों की चालाकी लातूर एमआईडीसी पुलिस के 'चार्ली दस्ते' की पैनी नजरों के सामने धरी की धरी रह गई। एक फिल्मी अंदाज में चली इस कार्रवाई ने न केवल अपराधियों के मंसूबों को नाकाम किया, बल्कि पुलिसिया सतर्कता और तकनीक के सटीक समन्वय की एक नई मिसाल पेश की है।

घटना की शुरुआत 25 जनवरी 2026 को हुई, जब एमआईडीसी पुलिस स्टेशन का मुस्तैद चार्ली दस्ता भाम्बरी चौक से साई नाका रिंग रोड के बीच नियमित गश्त पर था। इसी दौरान एच.पी. पेट्रोल पंप के सामने एक घने पेड़ के नीचे बैठे 18 से 20 वर्ष की आयु के पांच युवकों ने पुलिस का ध्यान खींचा। उनकी संदिग्ध शारीरिक भाषा और चेहरे पर पसरी घबराहट को ताड़ते हुए चार्ली दस्ते ने जब उनसे पूछताछ शुरू की, तो उन्होंने गोलमोल और विरोधाभासी जवाब देने शुरू कर दिए। उनकी आंखों में छिपा डर और पुलिस के सवालों से बचने की कोशिश ने जवानों के शक को यकीन में बदल दिया।

प्राथमिक पूछताछ में इन युवकों ने खुद को पुणे से आना बताया, लेकिन लातूर आने का ठोस कारण या ठहरने के ठिकाने के बारे में वे कोई भी संतोषजनक जानकारी नहीं दे पाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चार्ली दस्ते ने तत्काल तकनीक का सहारा लिया और संदिग्धों की तस्वीरें पुणे पुलिस के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा कर दीं। महज कुछ ही समय में पुणे पुलिस की ओर से आई जानकारी ने लातूर पुलिस के होश उड़ा दिए। यह पता चला कि ये पांचों युवक पुणे के खराडी इलाके में 24 जनवरी 2026 को हुई एक जघन्य हत्या के मामले में मुख्य आरोपी हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए लातूर में छिपे हुए थे।

पुष्टि होते ही पुलिस निरीक्षक समाधान चवरे के निर्देश पर डीबी (डिटेक्शन ब्रांच) की टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर पांचों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस स्टेशन में गहन पूछताछ के दौरान उनकी पहचान पुणे निवासी कैलाश विठ्ठल राठौड़, गणेश चंद्रकांत कट्टे, सुशील सुभाष कदम (सभी निवासी बायपास, खराडी), करण विठ्ठल तुरे (निवासी चंदननगर) और रोहित विकास गायकवाड़ (निवासी नानापेठ) के रूप में हुई। इन सभी के खिलाफ पुणे के वाघोली पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 333, 189(2), 189(4), 190, 191(3), 352 और भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 4 व 25 के तहत हत्या और गंभीर अपराधों का मुकदमा दर्ज था।

इस पूरी ऑपरेशन को लातूर के पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे, अपर पुलिस अधीक्षक मंगेश चव्हाण और उपविभागीय पुलिस अधिकारी समीरसिंह सालवे के कुशल मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। इस साहसिक कार्रवाई में चार्ली दस्ते के तुलसीदास घड़े, विजय जाधव सहित डीबी टीम के सहायक पुलिस उपनिरीक्षक भीमराव बेल्लाले, पुलिस कर्मी सचिन कांबळे, राजाभाऊ मस्के, अक्षय डिगोळे और सिद्धेश्वर टोम्पे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की जांच के लिए पुणे की वाघोली पुलिस की विशेष टीम के हवाले कर दिया गया है। लातूर पुलिस की इस मुस्तैदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितनी भी दूर भागने की कोशिश करे, कानून के हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं

Pratahkal Bureau

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