लातूर में सीआरपीएफ के 1166 जांबाजों ने ली राष्ट्र सेवा की शपथ: दीक्षांत परेड में दिखा अदम्य साहस और कौशल का संगम
महाराष्ट्र के लातूर में सीआरपीएफ रिक्रूट प्रशिक्षण केंद्र में बैच संख्या 32 की भव्य दीक्षांत परेड संपन्न हुई। विशेष महानिदेशक श्री अमित कुमार की उपस्थिति में 1166 जांबाजों ने देश सेवा की शपथ ली। इस लेख में गौरवपूर्ण समारोह, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों के सम्मान और सीआरपीएफ की राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का विस्तृत विवरण दिया गया है।

लातूर: महाराष्ट्र की वीर धरा लातूर आज उस समय गौरव और देशभक्ति के नारों से गुंजायमान हो उठी, जब केंद्रीय राखीव पुलिस बल (सीआरपीएफ) के रिक्रूट प्रशिक्षण केंद्र में 1166 नव-प्रशिक्षित जवानों ने संविधान और राष्ट्र की रक्षा की शपथ ली। कांस्टेबल (जीडी और ट्रेड्समैन) बैच संख्या 32 के इन जांबाजों ने 44 सप्ताह के बेहद कठिन और अनुशासित प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर आज मुख्य अतिथि के समक्ष अपनी दीक्षांत परेड प्रस्तुत की। इस भव्य समारोह में 400 शिपाई/जीडी, 592 चालक, 109 फिटर और 65 माली सहित कुल 1166 जवानों ने कदम-से-कदम मिलाकर अपनी सामरिक कुशलता का परिचय दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि श्री अमित कुमार (भा.पु.से.), विशेष महानिदेशक, सीआरपीएफ, मध्य जोन, कोलकाता ने परेड की सलामी ली। जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ देश की आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ है। उन्होंने नव-आरक्षकों को बल की गौरवशाली परंपराओं को अक्षुण्ण रखने और कर्तव्य पथ पर प्राणों की आहुति देने के लिए सदैव तत्पर रहने हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में पुलिस महानिरीक्षक (सी.एस.ए.एफ., चाकूर) श्री विनीत कुमार, रिक्रूट प्रशिक्षण केंद्र लातूर के प्राचार्य और पुलिस उपमहानिरीक्षक श्री अमीकल हसन अंसारी, सीटीसी सीआरपीएफ नांदेड़ के कमांडेंट श्री वेद प्रकाश और आरटीसी लातूर के मुख्य प्रशिक्षण अधिकारी व कमांडेंट श्री पारस नाथ शामिल थे। साथ ही, लातूर की जिला अधिकारी श्रीमती वर्षा ठाकुर पुगे (भा.प्र.से.) और पुलिस अधीक्षक श्री अमोल तांबे (भा.पु.से.) ने भी अपनी उपस्थिति से जवानों का उत्साहवर्धन किया।
कठोर प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वीरों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। कांस्टेबल (ड्राइवर) हितेश को 'बेस्ट ट्रेनी', 'ऑल राउंड बेस्ट ट्रेनी' और 'बेस्ट वेपन हैंडलिंग' का गौरव प्राप्त हुआ। कांस्टेबल (ड्राइवर) अर्जुन को 'बेस्ट स्पोर्ट्समैन', कांस्टेबल (बगलर) विमल सिंह को 'बेस्ट इन बी.ओ.ए.सी.', कांस्टेबल (ड्राइवर) सिम्मा नारायणराव को 'बेस्ट फायरर', कांस्टेबल (बगलर) हरेंद्र सिंह को 'बेस्ट इन ड्रिल' और कांस्टेबल (जीडी) प्रवीण बारला एवं पवार नीलेश को 'बेस्ट इन पीटी' के पुरस्कार से नवाजा गया। प्रशिक्षकों की श्रेणी में एएसआई (जीडी) ए.के. प्रुष्टी को 'बेस्ट ड्रिल इंस्ट्रक्टर' और एचसी (जीडी) रामचंद्र पांडा को 'बेस्ट इंस्ट्रक्टर' का सम्मान मिला।
परेड के समापन पर जवानों ने हैरतअंगेज बाइक स्टंट, मल्लखंब, जुंबा, कलारीपयट्टू और राइफल ड्रिल का ऐसा शानदार प्रदर्शन किया कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। 44 हफ्तों तक फील्ड क्राफ्ट, जंगल वारफेयर और फायरिंग के गुर सीखने वाले ये प्रशिक्षित जवान अब देश के संवेदनशील क्षेत्रों में नक्सलवाद, आतंकवाद और आपदा प्रबंधन जैसे मोर्चों पर तैनात होकर मां भारती की सेवा करेंगे। यह समारोह न केवल इन जवानों के करियर की शुरुआत है, बल्कि राष्ट्र की अखंडता को अक्षुण्ण रखने की दिशा में सीआरपीएफ का एक और ऐतिहासिक कदम है।

Pratahkal Bureau
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