धुले जिले में 31 जुलाई तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आवेदन किए जा सकते हैं, लेकिन अब तक केवल 370 किसानों ने ही खरीफ फसल का बीमा कराया है।

प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे के बीच किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसलों का बीमा कराना जरूरी माना जा रहा है, लेकिन धुले जिले में अब तक इसका अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला है। 13 जुलाई तक जिले में केवल 370 किसानों ने खरीफ फसलों का बीमा कराया है, जबकि बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। अब किसानों के पास केवल 15 दिन शेष हैं। कृषि विभाग की ओर से किसानों को योजना के प्रति जागरूक करने के लिए जनजागरण अभियान भी चलाया जा रहा है।

किसानों को हर वर्ष कभी सूखे तो कभी अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में खेतों में खड़ी फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा कराते हैं। इस वर्ष सभी खरीफ फसलों के बीमा के लिए 31 जुलाई तक आवेदन किए जा सकते हैं। इसके लिए फसल निरीक्षण के साथ फार्मर आईडी अनिवार्य है। इस वर्ष खरीफ की बुवाई देर से होने के कारण बीमा कराने वाले किसानों की संख्या कम रही है। पिछले वर्ष 15 जुलाई तक धुले जिले में 1,341 किसानों ने खरीफ फसल बीमा कराया था।

धुले जिले की 13 खरीफ फसलों को प्रधानमंत्री संशोधित फसल बीमा योजना के तहत शामिल किया गया है। इन सभी फसलों के लिए 70 प्रतिशत जोखिम स्तर निर्धारित किया गया है। अधिकांश फसलों के लिए किसानों को बीमा प्रीमियम का 2 प्रतिशत अंशदान देना होगा, जबकि कपास की फसल के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम निर्धारित किया गया है। 31 जुलाई तक बीमा कराने वाले किसानों को बुवाई से लेकर कटाई तक बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा। खरीफ मौसम के लिए धुले जिले में पीएफसी कंपनी की नियुक्ति की गई है।

सरकार ने किसानों पर आर्थिक बोझ कम रखने के उद्देश्य से बीमा प्रीमियम दरें सीमित रखी हैं। खरीफ मौसम की खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए 2 प्रतिशत, रबी मौसम के लिए 1.5 प्रतिशत तथा नकदी फसलों, जिनमें कपास और प्याज शामिल हैं, के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम निर्धारित किया गया है। शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार वहन करेगी।

योजना में शामिल होने के लिए किसानों के पास एग्रीस्टॉक फार्मर आईडी होना अनिवार्य किया गया है। डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे के अंतर्गत फसलों का पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है। इससे प्रत्येक खेत की फसल संबंधी सटीक जानकारी उपलब्ध होगी और नुकसान भरपाई की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

फसल बीमा आवेदन के लिए न्यूनतम 0.10 हेक्टेयर भूमि की शर्त रखी गई है। यदि कोई किसान फर्जी दस्तावेज जमा करता है, गलत जानकारी देता है या धोखाधड़ी करता पाया जाता है, तो उसे केवल फसल बीमा योजना ही नहीं बल्कि अन्य डीबीटी योजनाओं से भी पांच वर्ष के लिए अपात्र घोषित किया जाएगा।

यह योजना कर्जदार और गैर-कर्जदार दोनों प्रकार के किसानों के लिए पूरी तरह ऐच्छिक है। पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा, लेकिन इसके लिए पंजीकृत पट्टा अनुबंध संबंधित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

एचडीएफसी अर्गा जनरल इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से संचालित इस योजना में विभिन्न फसलों के लिए बीमा सुरक्षा और किसान प्रीमियम राशि निर्धारित की गई है। भुईमूंग के लिए 45,000 रुपये का बीमा संरक्षण तथा 112 रुपये प्रीमियम, सोयाबीन के लिए 63,500 रुपये संरक्षण और 156 रुपये प्रीमियम, मक्का के लिए 40,000 रुपये संरक्षण और 400 रुपये प्रीमियम, बाजरा के लिए 32,000 रुपये संरक्षण और 80 रुपये प्रीमियम, मूंग के लिए 30,000 रुपये संरक्षण और 600 रुपये प्रीमियम, उड़द के लिए 27,000 रुपये संरक्षण और 540 रुपये प्रीमियम, अरहर के लिए 47,000 रुपये संरक्षण और 117 रुपये प्रीमियम, कपास के लिए 62,500 रुपये संरक्षण और 2,047 रुपये प्रीमियम तथा प्याज के लिए 75,000 रुपये संरक्षण और 187 रुपये प्रीमियम निर्धारित किया गया है।

तालुका स्तर पर अब तक धुले में 141, साक्री में 85, शिरपुर में 53 और शिंदखेड़ा में 91 किसानों ने फसल बीमा कराया है। इस प्रकार जिले में कुल 370 किसानों ने खरीफ फसल बीमा योजना का लाभ लिया है।

शिरपुर के तालुका कृषि अधिकारी कैलास गोपाल ने कहा कि वर्तमान में कुछ किसानों की खरीफ बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ किसानों की बुवाई अभी जारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा और भविष्य में संभावित नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ अवश्य लें, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के समय उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

Pratahkal Bureau

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