रीवा में स्वच्छता अभियान के तहत किए गए इंतजामों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। देशभर में स्वच्छता अभियान के लिए अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन रीवा नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी इस अभियान को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। वर्षों पहले स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत शहर में लगाए गए यूरिनल बॉक्स अब या तो गायब हो चुके हैं या फिर कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। शहर के जिन स्थानों पर यूरिनल बॉक्स मौजूद हैं, वहां भी उनकी हालत बेहद खराब है। लोग यूरिनल बॉक्स के बाहर ही पेशाब करते दिखाई देते हैं, जबकि जिन स्थानों पर "यहां पेशाब करना मना है" लिखा गया है, वहीं खुले में पेशाब किए जाने के दृश्य आम हैं।

दरअसल, स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान रीवा शहर के अधिकांश हिस्सों में सार्वजनिक उपयोग के लिए यूरिनल बॉक्स लगाए गए थे, लेकिन अब वे शहर से लगभग विलुप्त हो चुके हैं। जो बॉक्स बचे भी हैं, उनकी स्थिति किसी कबाड़ से कम नहीं है। ऐसे हालात में लोगों को शहर में खुले में ही शौच करनी पड़ रही है। इसके साथ ही गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण के लिए पूरे शहर में लगाए गए कचरा बॉक्स भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं और उनका उपयोग लगभग बंद हो गया है।

बताया जा रहा है कि पार्षदों ने शहरवासियों की सुविधा के लिए स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग रखी थी। इसके बावजूद नगर निगम अधिकारियों ने पूरे शहर में अस्थायी प्लास्टिक के यूरिनल बॉक्स रखवा दिए। इन शौचालयों में पानी और नियमित साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं होने से धीरे-धीरे गंदगी का अंबार लग गया। गंदगी बढ़ने के कारण लोगों ने इनका उपयोग करना बंद कर दिया और बाद में ये यूरिनल बॉक्स एक-एक कर गायब होते चले गए। इन्हें नगर निगम के सफाई गोदाम में डंप कर कबाड़ के साथ रख दिया गया, जिससे नगर निगम के लाखों रुपये बर्बाद हो गए। विस्तार न्यूज़ जब इन कबाड़ हो चुके यूरिनल बॉक्स की तलाश करते हुए नगर निगम के गोदाम के पीछे पहुंचा तो वहां ये बॉक्स कबाड़ की स्थिति में पड़े मिले। वहीं, शहर में कचरे के लिए लगाए गए बॉक्स की हालत भी बेहद दयनीय मिली।

डब्ल्यूटी के दौरान कबाड़ हो चुके यूरिनल बॉक्स भी दिखाए गए। जानकारी के अनुसार, स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान रीवा नगर निगम ने सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुविधा के लिए करीब 65 अस्थायी यूरिनल बॉक्स लगवाए थे। प्रत्येक यूरिनल बॉक्स की कीमत 80 हजार रुपये से अधिक बताई गई है। महज तीन साल के भीतर ही शहर के कई हिस्सों से ये यूरिनल बॉक्स लापता हो गए और जो बचे हैं, वे अब कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। यह पूरा मामला स्वच्छता अभियान के तहत किए गए खर्च और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।

Pratahkal Bureau

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