15 साल से योजनाओं से वंचित परिवार का आरोप, रिकॉर्ड में बना दिया सरकारी कर्मचारी और करोड़ों की जमीन का मालिक
मुरैना के बानमोर में एक परिवार ने सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज होने का आरोप लगाया है। दावा है कि इसी वजह से 15 वर्षों से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला।

तस्वीर में चश्मा पहने हुए अशोक कुमार शर्मा खड़े होकर कैमरे की ओर देखकर मुस्कुरा रहे हैं।
मुरैना में गरीब कल्याण योजनाओं को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बानमोर नगर परिषद पर एक परिवार ने आरोप लगाया है कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें सरकारी कर्मचारी और एक हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि का मालिक दर्शा दिया गया, जबकि उनका दावा है कि उनके पास न सरकारी नौकरी है और न ही इतनी कृषि भूमि।
वार्ड-11 फूलगंज निवासी अशोक कुमार शर्मा का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए सरकारी कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालय, सीएम हेल्पलाइन और न्यायालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका।
पीड़ित के अनुसार, एसडीएम मुरैना ने उन्हें पात्र माना था, लेकिन नगर परिषद बानमोर ने अपने पत्र क्रमांक 2026/1137 दिनांक 08 जुलाई 2026 में उन्हें सरकारी कर्मचारी और एक हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि का मालिक बताते हुए रिपोर्ट भेज दी। अशोक कुमार शर्मा का आरोप है कि इसी कथित गलत जानकारी के कारण वे कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए।
अशोक कुमार शर्मा ने इस मामले में तीन बड़े सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर वे गरीब हैं तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला। यदि वे सरकारी कर्मचारी और करोड़ों की जमीन के मालिक हैं तो उसका प्रमाण और उससे संबंधित लाभ कहां है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए उन्हें नगर परिषद क्षेत्र का निवासी नहीं बताया गया, तो फिर 35 वर्षों से उनसे जलकर और हाउस टैक्स किस आधार पर वसूला गया।
पीड़ित ने नगर परिषद को 7 दिन का समय देते हुए कथित तथ्यों का प्रमाण मांगा है। उनका कहना है कि यदि अधिकारी अपने दावों को साबित नहीं कर सकते, तो गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अशोक कुमार शर्मा ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करने के साथ-साथ न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। यह मामला सरकारी रिकॉर्ड की सटीकता और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Pratahkal Bureau
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