विधायक संजय पाठक की कंपनी पर कार्रवाई, स्टाम्प चोरी मामले में रिकवरी आदेश
कटनी के कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने यश लॉजिस्टिक्स और 5 भू-स्वामियों पर लगाया जुर्माना, बाजार मूल्य छिपाकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप।

तस्वीर में विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक सफेद कुर्ता पहने नजर आ रहे हैं, जिनके पीछे दीवार पर एक धार्मिक चित्र फ्रेम लगा है।
विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। कथित तौर पर सहारा घोटाला और अवैध उत्खनन के आरोपों से घिरे विधायक की पारिवारिक कंपनी यश लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड अब करोड़ों रुपये की स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क चोरी के मामले में कार्रवाई के दायरे में आ गई है। कटनी के कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने कंपनी और पांच भू-स्वामियों के विरुद्ध महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए धोखाधड़ी से बचाए गए राजस्व की शास्ति (पेनल्टी) तथा 1 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज सहित रिकवरी के आदेश जारी किए हैं।
पूरा मामला बेशकीमती जमीनों की रजिस्ट्री के दौरान उनकी वास्तविक स्थिति छिपाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प न्यायालय के पीठासीन अधिकारी पंकज कोरी ने 29 जून 2026 को आदेश पारित किया। जांच में यह तथ्य सही पाया गया कि एनएच-7 (मिर्जापुर रोड) और मुख्य मार्गों से लगी करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनों को दस्तावेजों में अंदरूनी क्षेत्र का दर्शाकर स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क कम जमा कराया गया।
इस मामले का खुलासा कटनी की एमआईजी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी नाजिम खान की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 48-ख के तहत न्यायालय में शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि क्रेता कंपनी यश लॉजिस्टिक्स के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हर्ष कपूर ने भू-स्वामियों के साथ मिलकर वर्ष 2018 और 2019 में निष्पादित रजिस्ट्री दस्तावेजों में जानबूझकर हेराफेरी कर राजस्व की चोरी की।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने क्रेता पक्ष हर्ष कपूर को स्पीड पोस्ट से नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने कथित रूप से नोटिस लेने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए प्रकरणों में एकपक्षीय कार्रवाई प्रारंभ की। इसके बाद संयुक्त उप पंजीयक द्वारा कराए गए गोपनीय स्थल निरीक्षण में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए।
मौजा झिंझरी स्थित खसरा नंबर 292 से जुड़े पांच मामलों की सुनवाई में न्यायालय ने चार मामलों में गंभीर अनियमितताएं पाईं। सुनील कुमार सहजवानी तथा जसवंत कुमार मोहनानी से संबंधित खसरा नंबर 292/1, 292/5 और 292/6 की जमीनों की रजिस्ट्री के दौरान एनएच-7 की स्थिति छिपाई गई। न्यायालय ने दोनों मामलों में संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य लगभग 2 करोड़ 75 लाख 70 हजार 400 रुपये निर्धारित किया तथा प्रत्येक प्रकरण में 22 लाख 39 हजार 188 रुपये की स्टाम्प शुल्क कमी और 1 लाख 88 हजार 563 रुपये की पंजीयन शुल्क कमी निर्धारित की।
नानकराम भोजवानी से जुड़े खसरा नंबर 292/2 के मामले में मुख्य मार्ग की स्थिति के साथ मौके पर बने 3500 वर्ग फीट के टिनशेड की जानकारी भी दस्तावेजों में नहीं दर्शाई गई। न्यायालय ने संपत्ति का मूल्यांकन 2 करोड़ 95 लाख 23 हजार 400 रुपये करते हुए 24 लाख 24 हजार 723 रुपये की स्टाम्प शुल्क कमी तथा 2 लाख 4 हजार 187 रुपये की पंजीयन शुल्क कमी निर्धारित की।
अनिल टहलरमानी से संबंधित खसरा नंबर 292/4 में एनएच बिलहरी मोड़ से जुड़ी भूमि को दस्तावेजों में अंदरूनी क्षेत्र का दर्शाया गया। इस प्रकरण में 2 लाख 58 हजार 756 रुपये की स्टाम्प शुल्क कमी तथा 21 हजार 790 रुपये की पंजीयन शुल्क कमी पाई गई।
हालांकि, विक्रेता विजय कुमार टहलरमानी से संबंधित खसरा नंबर 292/3 का मामला उचित मुद्रांकित पाया गया, इसलिए इस प्रकरण में कोई अतिरिक्त कर अधिरोपित नहीं किया गया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल मूल स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क की वसूली ही नहीं होगी, बल्कि दस्तावेज निष्पादन की तिथि, अर्थात वर्ष 2018 से बकाया राशि पर 1 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से शास्ति और 1 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज भी वसूल किया जाएगा।
प्रकरण क्रमांक 54 में विक्रेता सुनील कुमार सहजवानी की मौजा झिंझरी स्थित खसरा नंबर 292/1 (0.29 हेक्टेयर) की भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य 2 करोड़ 75 लाख 70 हजार 400 रुपये निर्धारित करते हुए 22 लाख 39 हजार 188 रुपये स्टाम्प शुल्क कमी और 1 लाख 88 हजार 563 रुपये पंजीयन शुल्क कमी की रिकवरी के आदेश दिए गए।
प्रकरण क्रमांक 55 में विक्रेता अनिल टहलरमानी के खसरा नंबर 292/4 (0.30 हेक्टेयर) में 2 लाख 58 हजार 756 रुपये स्टाम्प शुल्क कमी तथा 21 हजार 790 रुपये पंजीयन शुल्क कमी की वसूली के आदेश पारित किए गए।
प्रकरण क्रमांक 56 में विक्रेता जसवंत कुमार मोहनानी के खसरा नंबर 292/5 एवं 292/6 (0.29 हेक्टेयर) के संबंध में 22 लाख 39 हजार 188 रुपये स्टाम्प शुल्क कमी तथा 1 लाख 88 हजार 563 रुपये पंजीयन शुल्क कमी निर्धारित की गई।
प्रकरण क्रमांक 57 में विक्रेता नानकराम भोजवानी के खसरा नंबर 292/2 (0.29 हेक्टेयर) की भूमि का मूल्यांकन 2 करोड़ 95 लाख 23 हजार 400 रुपये करते हुए 24 लाख 24 हजार 723 रुपये स्टाम्प शुल्क कमी और 2 लाख 4 हजार 187 रुपये पंजीयन शुल्क कमी की रिकवरी के आदेश दिए गए।
कटनी के कलेक्टर ऑफ स्टाम्प के इस आदेश ने कथित स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क चोरी के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का संकेत दिया है। वर्ष 2018 से देय शास्ति और 1 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज सहित रिकवरी के आदेशों के बाद यह मामला राजस्व अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो गया है।

Pratahkal Bureau
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