अमरपाटन के जंगलों से बांधवगढ़ जाएगा नर हाथी ई-5, 25 सदस्यीय दल करेगा रेस्क्यू
मैहर के अमरपाटन जंगलों में 10 दिनों से विचरण कर रहे नर हाथी ई-5 को मानव-हाथी द्वंद की आशंका के बीच बांधवगढ़ ले जाने की तैयारी है। 25 सदस्यीय दल और चार प्रशिक्षित हाथियों के साथ रेस्क्यू होगा।

तस्वीर में मैहर के अमरपाटन क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ एक सड़क किनारे खड़े होकर चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं।
मैहर जिले के अमरपाटन के जंगलों में पिछले करीब 10 दिनों से विचरण कर रहे नर हाथी ई-5 को अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ले जाने की तैयारी तेज हो गई है। मानव-हाथी द्वंद की बढ़ती आशंका के बीच वन विभाग ने ई-5 को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से रेस्क्यू और ट्रांसलोकेशन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शनिवार को ई-5 के रेस्क्यू की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उच्च अधिकारियों के अलावा एसडीओ, रेंजर, चिकित्सकों सहित करीब 25 सदस्यीय वन्यजीव अमला मैहर जिले के अमरपाटन पहुंच चुका है। रेस्क्यू अभियान के लिए विभाग के चार प्रशिक्षित हाथी सूर्या, रामा, लक्ष्मण और श्याम भी अपने महावतों के साथ अमरपाटन पहुंच गए हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों और वन्यजीव अमले की निगरानी में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत ई-5 को ट्रैंकुलाइज किया जाएगा। इसके बाद उसके रेस्क्यू और ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बताया गया है कि बुधवार को प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. श्रीमती समीता रजौरा की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एलीफेंट एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई थी। बैठक में अमरपाटन में विचरण कर रहे ई-5 के पिछले करीब 10 दिनों के व्यवहार, निगरानी रिपोर्ट और क्षेत्र की संवेदनशील परिस्थितियों की समीक्षा की गई। इसके बाद ई-5 को बांधवगढ़ लाने का निर्णय लिया गया।
वन विभाग के अनुसार ई-5 को इससे पहले शहडोल क्षेत्र में इंसानी हमले के बाद रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद वह मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र में पहुंचा। यहां भी मानव-हाथी द्वंद की स्थिति सामने आने के बाद उसे दोबारा रेस्क्यू कर बांधवगढ़ लाने की तैयारी की जा रही है। बांधवगढ़ में ई-5 को कॉलर-4 के नाम से भी जाना जाता है।
अब अमरपाटन से बांधवगढ़ तक ई-5 के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। चार प्रशिक्षित हाथियों, करीब 25 सदस्यीय वन्यजीव दल और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में होने वाला यह रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण होगा। इसके बाद ई-5 को बांधवगढ़ के नए वनक्षेत्र में सुरक्षित रूप से बसाना भी वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

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