कटनी: बांद्रा एक्सप्रेस में खान-पान की वस्तुओं पर अवैध वसूली की शिकायत
बांद्रा टर्मिनस सुपरफास्ट एक्सप्रेस में यात्री से एमआरपी से अधिक वसूली और अभद्रता का मामला सामने आया है। पीड़ित ने रेलवे प्रशासन को औपचारिक शिकायत दी है।

कटनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर खड़ी ट्रेन के पास वेंडर और यात्री मौजूद हैं।
भारतीय रेल के सफर में खान-पान की वस्तुओं के लिए निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली और वेंडरों द्वारा की जाने वाली मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। कटनी स्टेशन से होकर गुजरने वाली बांद्रा टर्मिनस सुपरफास्ट एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 22972) में एक यात्री से प्रिंट रेट से अधिक पैसे वसूलने और विरोध करने पर वेंडर द्वारा अभद्रता करने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटनाक्रम के अनुसार, पीड़ित यात्री ने जब ट्रेन में उपलब्ध खान-पान की वस्तु का बिल मांगा, तो वेंडर ने न केवल निर्धारित मूल्य से 10 से 20 रुपये तक अतिरिक्त धनराशि की मांग की, बल्कि बिल मांगने पर यात्री के साथ दुर्व्यवहार भी किया। यात्री ने इस पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया, जो अब सार्वजनिक हो चुका है। पीड़ित ने आधिकारिक तौर पर रेलवे प्रशासन के समक्ष इस घटना की शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि कटनी और आसपास के स्टेशनों से गुजरने वाली अधिकांश ट्रेनों में वेंडर्स का एक संगठित तंत्र सक्रिय है, जो यात्रियों से खुलेआम अवैध वसूली कर रहा है।
रेलवे और आईआरसीटीसी के स्पष्ट निर्देश हैं कि ट्रेनों में यात्रियों को खाने-पीने की वस्तुएं केवल प्रिंट रेट यानी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर ही उपलब्ध कराई जाएं। इन नियमों का उल्लंघन न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यात्रियों का आरोप है कि वेंडर्स इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जबकि संबंधित अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया से अनभिज्ञ बने हुए हैं।
इस घटना ने रेल यात्रियों में भारी आक्रोश भर दिया है। जागरूक नागरिकों और पीड़ित यात्री ने रेलवे प्रशासन से अविलंब संज्ञान लेने की मांग की है। मांग की गई है कि दोषी वेंडर का लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए और ट्रेनों में चल रही अवैध वसूली पर प्रभावी रोक लगाई जाए। यह घटना केवल एक वेंडर के दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक समस्या को रेखांकित करती है जिसका सामना दैनिक आधार पर हजारों रेल यात्री कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या रेलवे प्रशासन इस मामले में कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करता है या यात्रियों को भविष्य में भी इस तरह की मनमानी का सामना करना पड़ेगा।

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