कटनी: कागजों में ट्रांसफर, हकीकत में रीठी में ड्यूटी; चार कर्मचारियों के भरोसे बड़गांव अस्पताल
कटनी जिले के बड़गांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी से मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कागजों में ट्रांसफर के बाद भी कर्मचारी रीठी में ड्यूटी कर रहे हैं। जानिए क्या है पूरी खबर और क्यों ठप है स्वास्थ्य सेवाएं।

तस्वीर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव के मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुजस मोदी नजर आ रहे हैं।
कटनी जिले की रीठी तहसील स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव इन दिनों गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है, जिससे यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों की सेहत पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अस्पताल में तैनात कर्मचारियों का स्थानांतरण प्रशासनिक स्तर पर कागजों में तो हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल आज भी महज चार कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव में करीब नौ कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं और वे यहीं पदस्थ बताए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में केवल चार कर्मचारी ही नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शेष कर्मचारी रीठी में ही अटैच हैं, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव अस्पताल की ओपीडी, उपचार व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। नवागत बीएमओ द्वारा सभी स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर अस्पताल पहुंचने और लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, लेकिन इसके बावजूद बड़गांव में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा कार्यभार ग्रहण न करना प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
इस संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव के मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुजस मोदी ने बताया कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा जिन कर्मचारियों का रीठी से बड़गांव स्थानांतरण किया गया था, वे 10 जून 2026 को नवागत बीएमओ द्वारा जारी आदेश के बाद भी आज तक नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। यह स्थानांतरण आदेश अब तक केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित है। मेडिकल ऑफिसर ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि जिन कर्मचारियों की मूल पदस्थापना बड़गांव में है, उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण कराया जाए और रीठी में चल रहे अटैचमेंट को समाप्त किया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होने पर ही मरीजों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकेंगी। अब बड़ा सवाल यह है कि विभागीय स्थानांतरण आदेश लागू होने के बावजूद संबंधित कर्मचारी ड्यूटी क्यों नहीं कर रहे और क्या कागजों में हुए इन तबादलों के कारण ग्रामीण क्षेत्र के मरीज बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच उपचार के लिए मजबूर रहेंगे।

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