डिंडौरी जिले में इंसानियत और वन्यजीव संरक्षण की एक प्रेरणादायक घटना सामने आई, जहां जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे किनारे निर्माणाधीन स्वास्थ्य विभाग की बिल्डिंग में काम कर रहे युवकों की सतर्कता और संवेदनशीलता ने एक बेजुबान हिरण की जान बचा ली। समय रहते युवकों ने हिम्मत और सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो कुत्तों के हमले में हिरण की मौत भी हो सकती थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक हिरण अचानक निर्माणाधीन भवन परिसर में पहुंच गया। इसी दौरान आसपास मौजूद आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों से घिरा हिरण खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगा। यह दृश्य देखकर वहां काम कर रहे मजदूर और युवक तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े। उन्होंने कुत्तों को मौके से भगाया और घायल हिरण को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर एक कमरे में रखा, ताकि उस पर दोबारा हमला न हो सके।

घटना के तुरंत बाद युवकों ने बिना देर किए वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल हिरण का रेस्क्यू कर उसे उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में संभावना जताई गई है कि हिरण कारोपानी अभ्यारण्य से भटककर आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच गया था, जहां वह कुत्तों के हमले का शिकार हो गया।

फिलहाल हिरण का उपचार जारी है और उसकी हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वस्थ होने के बाद उसे दोबारा सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।

यह घटना न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि आम नागरिकों की जागरूकता और त्वरित कार्रवाई कई बार किसी बेजुबान की जिंदगी बचा सकती है। युवकों की इस संवेदनशील पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। यह घटना यह संदेश भी देती है कि प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।

Pratahkal Bureau

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