"जवानों की इनर इंजीनियरिंग:" ईशा योग सेंटर में 99 सैन्य योद्धाओं ने सीखी हठ योग की शक्ति!
सेना और नौसेना के जवानों ने सीखी 'इनर इंजीनियरिंग'; 15 दिनों के प्रशिक्षण के बाद अब अपनी यूनिट्स में देंगे योग की शिक्षा।

ईशा योग सेंटर में आयोजित 'ट्रेन द ट्रेनर' कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों ने योग की प्राचीन विद्या में महारत हासिल की है। कोयंबटूर के इस प्रतिष्ठित केंद्र में सेना और नौसेना के 99 जवानों ने 15 दिनों के गहन प्रशिक्षण के बाद 'क्लासिकल हठ योग' का सफलतापूर्वक अभ्यास पूरा किया। इस दल में नौसेना के 78 और सेना के 21 जांबाज शामिल थे, जो अब अपने-अपने सैन्य केंद्रों पर अन्य साथियों को योग की शिक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
23 मार्च से 6 अप्रैल तक चले इस विशेष सत्र के दौरान जवानों को 'उप योग', 'सूर्य क्रिया' और 'इनर इंजीनियरिंग' जैसी महत्वपूर्ण पद्धतियों का अभ्यास कराया गया। इस प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य सैन्य कर्मियों को मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और शारीरिक सुदृढ़ता प्रदान करना है, ताकि वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सुरक्षा का दायित्व और भी मजबूती से निभा सकें। अब तक इस पहल के तहत 700 से अधिक जवानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
भारतीय नौसेना के कैप्टन श्रीकांत जोशी सहित अन्य अधिकारियों ने इस अनुभव को 'आत्म-साक्षात्कार' और 'मानसिक स्पष्टता' का एक नया मार्ग बताया। जवानों ने माना कि योग के माध्यम से कठिन समय में घबराहट पर नियंत्रण पाना और बेहतर निर्णय लेना संभव हुआ है। कमांडर राहुल जायसवाल और लेफ्टिनेंट अंजलि गोयल ने साझा किया कि योग अब उनके लिए केवल शारीरिक कसरत नहीं, बल्कि एक 'इनर इंजीनियरिंग' बन गया है जिससे उन्हें तनाव प्रबंधन में अभूतपूर्व मदद मिली है।
प्रशिक्षण के साथ-साथ जवानों ने ईशा विद्या स्कूल और आश्रम के पवित्र स्थानों जैसे ध्यानलिंग और लिंग भैरवी के दर्शन किए। सेवा भाव को आत्मसात करते हुए अधिकारियों ने 'अन्नदानम' में भी भाग लिया और साधकों को भोजन परोसा। यह कार्यक्रम न केवल सैन्य बलों की शारीरिक दक्षता को बढ़ाता है, बल्कि उनके भीतर सेवा, शांति और आंतरिक शक्ति का एक नया संचार भी करता है।

Lalita Rajput
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