कोटा, 14 नवम्बर।

विश्व मधुमेह दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि जीवनशैली और स्वास्थ्य के बीच के नाजुक संतुलन की चेतावनी है। हर वर्ष 14 नवंबर को मनाया जाने वाला यह दिवस इस बार “जीवन के विभिन्न चरणों में मधुमेह” थीम के साथ मधुमेह जागरूकता की नई दिशा तय कर रहा है। सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुरेश पाण्डेय और डॉ. विदुषी शर्मा ने बताया कि मधुमेह अब केवल वृद्धावस्था की बीमारी नहीं रही, बल्कि यह बचपन से लेकर युवावस्था और प्रौढ़ावस्था तक हर आयु वर्ग को प्रभावित कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आज विश्वभर में 54 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह से जूझ रहे हैं, जबकि भारत में इसका आंकड़ा लगभग 8 करोड़ तक पहुंच चुका है। अनुमान है कि वर्ष 2045 तक यह संख्या 12 करोड़ के पार हो जाएगी। चिंताजनक तथ्य यह है कि हर छठा मधुमेह रोगी भारतीय है और उनमें से आधे को अपने रोग की जानकारी तक नहीं होती। जब तक इसका पता चलता है, तब तक शरीर में गंभीर जटिलताएं पनप चुकी होती हैं।

डॉ. पाण्डेय और डॉ. शर्मा ने बताया कि बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता मधुमेह को महामारी का रूप दे रही हैं। देर रात तक जागना, मीठे पेय पदार्थों का सेवन और व्यायाम की कमी इंसुलिन संतुलन को बिगाड़ देती है। तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे रक्त शर्करा बढ़ने लगता है। विशेषज्ञों ने कहा कि “वर्क फ्रॉम होम” कल्चर और तनावपूर्ण दिनचर्या ने इस खतरे को और गहरा किया है।

मधुमेह का असर केवल रक्त शर्करा तक सीमित नहीं रहता। यह आंखों, हृदय, किडनी, मस्तिष्क और पैरों तक को प्रभावित करता है। डॉ. विदुषी शर्मा के अनुसार, डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह रोगियों में अंधत्व का प्रमुख कारण है। मधुमेह रोगियों में अंधता का खतरा सामान्य व्यक्तियों की तुलना में लगभग 25 गुना अधिक होता है। इसलिए हर रोगी को वर्ष में कम से कम दो बार रेटिना टेस्ट अवश्य कराना चाहिए ताकि आंखों की स्थिति का समय रहते पता चल सके।

डॉ. पाण्डेय ने बताया कि मधुमेह से हृदयाघात, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर और पैरों में अल्सर या गैंग्रीन जैसी गंभीर स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। पैरों में रक्त संचार कम होने से घाव भरने में देरी होती है और गंभीर मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ जाती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय स्वस्थ जीवनशैली है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव का प्रबंधन मधुमेह नियंत्रण की कुंजी हैं। भोजन में फाइबर, फल और हरी सब्जियों को शामिल करना, मीठे पेय और जंक फूड से परहेज करना आवश्यक है। प्रतिदिन 30 मिनट तेज चाल में चलना या योग करना रक्त में शुगर स्तर को नियंत्रित रखता है। पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारती है।

मधुमेह के शुरुआती लक्षणों की पहचान भी अत्यंत जरूरी है। 40 वर्ष की आयु के बाद हर व्यक्ति को वर्ष में दो बार ब्लड शुगर जांच और साथ में हृदय, किडनी व आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए। डॉ. विदुषी शर्मा ने बताया कि मधुमेह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। लंबे समय तक चलने वाली इस बीमारी से तनाव, अवसाद और निराशा जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। इसलिए रोगियों को भावनात्मक सहयोग, योग और ध्यान का सहारा लेना चाहिए।

भारत को अब “डायबिटिक कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाने लगा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से इस स्थिति को बदला जा सकता है। समाज, चिकित्सकों और सरकार को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी। स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर हेल्थ चेकअप, पौष्टिक आहार व व्यायाम को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम इस दिशा में निर्णायक कदम हो सकते हैं।

विश्व मधुमेह दिवस हमें यह संदेश देता है कि यह रोग केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि जीवनशैली की चेतावनी है। समय रहते जागरूकता और सावधानी अपनाकर हम न केवल स्वयं को, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रख सकते हैं।

Pratahkal Bureau

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