कोटा, 22 जनवरी। प्रकृति और मानव का अटूट रिश्ता सदियों से हमारी संस्कृति का आधार रहा है। इसी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और भावी पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से शिक्षा नगरी कोटा में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की एक नई अलख जगाई गई। शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा 696 और राजस्थान राज्य भारत स्काउट एंड गाइड स्थानीय संघ कोटा दक्षिण के साझा प्रयासों से आयोजित 'वन एवं वन्यजीव संरक्षण पखवाड़ा' वर्तमान में जन-जन की भागीदारी का केंद्र बन गया है। इस पखवाड़े के तहत गुरुवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आवासन मंडल केशवपुरा के प्रांगण में एक रोमांचक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसने न केवल ज्ञान की परीक्षा ली बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को भी उभारा।

कार्यक्रम का आगाज मुख्य अतिथि सहायक जिला कमिश्नर गाइड नीलम त्रिपाठी की उपस्थिति में हुआ, जिन्होंने दीप प्रज्वलन कर पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। नीलम त्रिपाठी ने अपने संबोधन में गहराई से इस बात को रेखांकित किया कि वन और वन्यजीव हमारे अस्तित्व के अनमोल स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि ये मूक जीव और हरे-भरे जंगल हमें न केवल प्राणवायु ऑक्सीजन और अमूल्य प्राकृतिक संसाधन देते हैं, बल्कि पृथ्वी की जैव विविधता को संतुलित रखने में इनकी भूमिका अद्वितीय है। भारत की मिट्टी में तो वन्यजीव संरक्षण हमारे धार्मिक और सामाजिक संस्कारों में रचा-बसा है, जिसे आज की युवा पीढ़ी तक पहुँचाना अनिवार्य है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिक्षा सहकारी के अध्यक्ष एवं स्काउट गाइड के जिला प्रधान प्रकाश जायसवाल ने समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वनों का संरक्षण केवल एक जैविक आवश्यकता नहीं, अपितु यह हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक नैतिकता का प्रमाण है। हमारे रीति-रिवाजों ने सदैव प्रकृति को पूजनीय माना है, और इसी संतुलित पर्यावरण को संजोकर रखना हमारा परम कर्तव्य है ताकि आने वाली पीढ़ियां एक स्वस्थ वातावरण में सांस ले सकें। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय की संयुक्त मंत्री गिरिजा सुमन एवं सुमन गुप्ता ने भी शिरकत की और विजेताओं के उत्साहवर्धन में अपनी भूमिका निभाई।

प्रतियोगिता का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था, जब पहली कक्षा के एक नन्हे बालक ने क्विज के जटिल प्रश्नों का सटीक उत्तर देकर वहां मौजूद अतिथियों और शिक्षकों को अचंभित कर दिया। छोटे से बालक के आत्मविश्वास ने पूरी सभा की वाहवाही लूटी और यह सिद्ध कर दिया कि जागरूकता की कोई उम्र नहीं होती। आयोजन के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कारों से नवाजा गया। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने केशवपुरा के विद्यार्थियों के मन में प्रकृति के प्रति एक नए संकल्प का बीजारोपण किया, जो आने वाले समय में एक सशक्त और हरित समाज की नींव बनेगा।

Pratahkal Newsroom

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