कोटा में “Walk a Mile for Little Smile” जागरूकता वॉक: समयपूर्व जन्मे शिशुओं की दृष्टि सुरक्षा पर जोर
कोटा में Saroya Eye Hospital द्वारा आयोजित “Walk a Mile for Little Smile” जागरूकता वॉक और निःशुल्क ROP स्क्रीनिंग कैंप में समयपूर्व जन्मे शिशुओं की दृष्टि सुरक्षा पर जोर। विशेषज्ञों ने 1-2-34 नियम के पालन की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

कोटा, 15 नवम्बर: विश्व प्रीमैच्योरिटी डे (17 नवम्बर) के अवसर पर Saroya Eye Hospital ने समयपूर्व जन्मे शिशुओं में होने वाली गंभीर नेत्र समस्या Retinopathy of Prematurity (ROP) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु श्रीनाथपुरम स्टेडियम, कोटा में “Walk a Mile for Little Smile” नामक विशेष जागरूकता वॉक का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम से एक दिन पूर्व, 14 नवम्बर को हॉस्पिटल परिसर में निःशुल्क ROP स्क्रीनिंग कैंप आयोजित किया गया, जिसमें कुल 66 आंखों की जांच की गई। यह परीक्षण रेटिना सर्जन एवं ROP विशेषज्ञ डॉ. गरिमा लाखोटिया और रेटिना एवं IOL विशेषज्ञ डॉ. शैना सरोया द्वारा संपन्न किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि समयपूर्व जन्मे शिशुओं में ROP अत्यंत तेजी से विकसित होकर स्थायी अंधत्व का कारण बन सकती है, लेकिन समय पर स्क्रीनिंग के माध्यम से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ROP की रोकथाम से संबंधित सरल म्नीमोनिक “1-2-34” के बारे में जानकारी दी गई। इसका अर्थ है—जन्म के 1 माह के भीतर पहली ROP स्क्रीनिंग, 2 किलोग्राम या उससे कम वजन वाले हर शिशु की अनिवार्य जांच, तथा 34 सप्ताह या उससे पहले जन्मे सभी शिशुओं की स्क्रीनिंग। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि इस नियम का पालन ROP से होने वाली अधिकांश स्थायी दृष्टि हानियों को रोकने में अत्यंत प्रभावी है।
Saroya Eye Hospital के डायरेक्टर डॉ. जे. एस. सरोया और को-डायरेक्टर डॉ. अरणव सरोया ने कहा कि समयपूर्व जन्मे शिशुओं में आंखों की समय पर जांच न होने से जीवनभर की दृष्टि हानि का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने माता-पिता और समुदाय को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया।
जागरूकता वॉक में लगभग 350 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। युवाओं सहित उपस्थित लोगों को ROP के लक्षण, जोखिम कारक, स्क्रीनिंग की समय-सारणी और उपचार विकल्पों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ROP की पहचान और उपचार केवल प्रशिक्षित नेत्र विशेषज्ञ ही कर सकते हैं, इसलिए समय पर रेफरल और फॉलो-अप जांच अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में शहर के अनेक विशिष्ट नागरिक और विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिनमें श्रीमती अर्चना सरोया, डॉ. आशीष लड्डा, डॉ. राकेश उपाध्याय, सामाजिक कार्यकर्ता श्री घनश्याम मुंद्रा, श्री वेद तिवारी, डॉ. अंशुल माथुर, डॉ. अंकिता माथुर, डॉ. श्वेता साहू, डॉ. रुचि एवं ऋतेश साहू, अधिवक्ता प्रखर, आशीष जैन, विक्रम, गुंजन गांधी, चिराग, शिक्षिका किरण मैडम, संगीता मैडम, तथा स्वास्थ्य प्रशिक्षक अमित चतुर्वेदी शामिल थे।
Saroya Eye Hospital द्वारा आयोजित यह वॉक और स्क्रीनिंग कैंप कोटा में समयपूर्व जन्मे शिशुओं की दृष्टि सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह था कि ROP से होने वाली स्थायी दृष्टि हानि को समय पर जांच और 1-2-34 नियम के पालन से पूरी तरह रोका जा सकता है, और इसी उद्देश्य से यह जन-जागरूकता अभियान निरंतर जारी रहेगा।
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Pratahkal Bureau
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