कोटा/ऋषिकेश। समाज के सशक्तीकरण और नेतृत्व कौशल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से विप्र फाउंडेशन द्वारा उत्तराखंड की पावन धरा ऋषिकेश में आयोजित होने वाला दो दिवसीय सांगठनिक प्रशिक्षण शिविर 'आरोहण' आज से प्रारंभ हो रहा है। संगठन के इतिहास में मील का पत्थर माने जा रहे इस शिविर में सहभागिता करने के लिए कोटा जोन से 35 ऊर्जावान पदाधिकारियों का एक जत्था शुक्रवार को नंदादेवी एक्सप्रेस से रवाना हुआ। 10 और 11 जनवरी को आयोजित होने वाले इस विशेष शिविर में देशभर से चयनित लगभग 450 'नायक' जुटेंगे, जिनमें राजस्थान का प्रतिनिधित्व सर्वाधिक और प्रभावशाली रहने वाला है।

कोटा रेलवे स्टेशन पर उत्साह और जोश का अनूठा माहौल दिखाई दिया, जब विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भुवनेश्वर शर्मा (चच्चू भैया) और वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे एम्पलाईज यूनियन के महामंत्री एवं ऑल इण्डिया रेलवेमैन्स फैडरेशन के सहायक महामंत्री मुकेश गालव के निर्देशन में जत्थे का आत्मीय अभिनंदन किया गया। स्टेशन पर उपस्थित परिजनों और कार्यकर्ताओं ने प्रतिनिधियों को फूल मालाएं पहनाईं और दुपट्टा ओढ़ाकर मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। यह जत्था विप्र फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण मुरारी चतुर्वेदी, महिला प्रदेश अध्यक्षा शशि शर्मा और प्रदेश संगठन प्रमुख महासचिव हरिसूदन शर्मा के कुशल नेतृत्व में ऋषिकेश के लिए प्रस्थान कर चुका है। इस रवानगी के अवसर पर श्रेयांस शर्मा, अमरेश झा, बृजेश शर्मा, योगेश मिश्रा, हेमंत शर्मा, नंद किशोर शर्मा नंदु, रघुवेंद्र पांडे, आलोक शर्मा और ऋषभ दुबे सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया।

शिविर के संयोजक सीए डॉ. सुनील शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर को 'आरोहण' नाम दिया गया है, जो संगठन के प्रति समर्पण और व्यक्तिगत विकास की चढ़ाई का प्रतीक है। दो दिनों के भीतर कुल 9 सघन विचारोत्तेजक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अनुभवी वक्ता संगठन के नायकों को आत्मविकास, नेतृत्व कौशल और उनके सांगठनिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन का प्रशिक्षण देंगे। यह शिविर मात्र बौद्धिक चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें योग, देवदर्शन, गंगा आरती और सांस्कृतिक संगीत संध्या जैसे कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं, जो प्रतिभागियों को आध्यात्मिक और मानसिक ऊर्जा प्रदान करेंगे।

विप्र फाउंडेशन का यह 'आरोहण' शिविर न केवल नेतृत्व निर्माण की दिशा में एक बड़ी पहल है, बल्कि इसमें महिलाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी समाज की बदलती सोच और सांगठनिक विस्तार को भी रेखांकित कर रही है। ऋषिकेश की पवित्रता के बीच होने वाला यह मंथन आने वाले समय में विप्र फाउंडेशन की कार्यप्रणाली को और अधिक संगठित और सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Pratahkal Bureau

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