कोटा में पहली बार वेल्स रोबोटिक तकनीक से सफल घुटना प्रत्यारोपण
भारत विकास परिषद अस्पताल में डॉ. विश्वास शर्मा के नेतृत्व में मिली ऐतिहासिक सफलता, गंभीर आर्थराइटिस से पीड़ित मरीज को मिला नया जीवन।

कोटा के भारत विकास परिषद अस्पताल में वेल्स रोबोटिक तकनीक से हुए पहले सफल घुटना प्रत्यारोपण के बाद (बाएं से दाएं) अस्पताल अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, वरिष्ठ जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. विश्वास शर्मा, वॉकर के सहारे खड़ी मरीज और अस्पताल संरक्षक श्याम शर्मा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान।
शिक्षा नगरी कोटा की स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। महानगरों (मेट्रो सिटी) की तर्ज पर अब कोटा में भी अत्याधुनिक इंटरएक्टिव रोबोट वैलिस सर्जरी की सुविधा सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है। शहर के प्रतिष्ठित भारत विकास परिषद अस्पताल (बीवीआईएमएस) में चिकित्सा इतिहास में पहली बार इंटरनेशनल इंटरैक्टिव रोबोट वेल्स (VELYS) रोबोटिक सहायक घुटना प्रत्यारोपण शल्यक्रिया को शत-प्रतिशत सफलता के साथ संपन्न किया गया है। क्षेत्र के वरिष्ठ जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. विश्वास शर्मा के कुशल नेतृत्व में अंजाम दिए गए इस सफल ऑपरेशन ने गंभीर घुटना गठिया (आर्थराइटिस) की पीड़ा से जूझ रहे मरीजों के लिए चिकित्सा जगत में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।
वरिष्ठ जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. विश्वास शर्मा ने सफल ऑपरेशन के बाद पत्रकारों से विस्तृत बातचीत करते हुए इस युगांतरकारी सर्जरी के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि घुटनों की अत्यधिक घिसावट से पीड़ित मरीज लंबे समय से असहनीय व तीव्र दर्द, सामान्य रूप से चलने-फिरने में भारी कठिनाई और घुटनों में गंभीर जकड़न की अत्यंत कष्टप्रद समस्या से ग्रसित था। इस जटिल अवस्था में इंटरनेशनल इंटरैक्टिव वेल्स रोबोटिक तकनीक की सहायता ली गई, जिसके माध्यम से किए गए इस प्रथम सफल घुटना प्रत्यारोपण के तत्काल बाद मरीज की शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य में बेहद सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।
चिकित्सकीय बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. विश्वास शर्मा ने बताया कि Velys जैसी अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय रोबोटिक तकनीक किसी भी अनुभवी सर्जन के मार्गदर्शन में किए जाने वाले ऑपरेशन को अत्यधिक सटीक (प्रिसाइज), पूर्णतः सुरक्षित और सर्वाधिक प्रभावी बनाती है। उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि इस तकनीक के अंतर्गत प्रत्येक मरीज की आयु, उनकी हड्डियों की वास्तविक गुणवत्ता, शारीरिक विकृति की गंभीरता और उनकी दैनिक जीवनशैली को पूरी तरह ध्यान में रखकर एक कस्टमाइज्ड उपचार योजना तैयार की जाती है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है और इसके परिणाम दीर्घकालिक एवं अत्यंत सुरक्षित सुनिश्चित होते हैं। घुटना प्रत्यारोपण के क्षेत्र में डॉ. विश्वास शर्मा का वर्षों का व्यापक अनुभव और उनके द्वारा दिए जा रहे लगातार सफल परिणाम ही हैं, जो चिकित्सा क्षेत्र में मरीजों के अटूट भरोसे को निरंतर मजबूत कर रहे हैं।
इस अभूतपूर्व चिकित्सा उपलब्धि पर अस्पताल प्रबंधन ने भी अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। भारत विकास परिषद अस्पताल के संरक्षक श्याम शर्मा ने इसे समग्र कोटा संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक ऐतिहासिक व मील का पत्थर साबित होने वाली उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आई यह रोबोटिक तकनीक स्थानीय मरीजों को अधिक सुरक्षित, सटीक और उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं, अस्पताल के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए बताया कि बीवीआईएमएस एवं भारत विकास परिषद आने वाले समय में अन्य विभिन्न प्रकार के जटिल चिकित्सा ऑपरेशनों में भी इस अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक को पूर्ण रूप से शुरू करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहे हैं। इस दूरदर्शी प्रयास का मुख्य उद्देश्य यह है कि क्षेत्रवासियों को किसी भी बड़े इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही ऐसी आधुनिक व उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभता से मिल सकें। निश्चित रूप से, कोटा में हासिल हुई यह बड़ी चिकित्सा उपलब्धि गंभीर घुटना गठिया से पीड़ित असहाय मरीजों के लिए एक नई आशा का संबल बनकर सामने आई है, जिससे अब उन्हें सर्वोत्तम उपचार प्राप्त होने के साथ-साथ अत्यंत शीघ्रता से अपने सामान्य व दर्दमुक्त जीवन में लौटने का अमूल्य अवसर मिलेगा।

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