उदयपुर। राष्ट्रगीत वंदेमातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय के तत्वावधान में देशभक्ति गीतों से ओतप्रोत "शताब्दी स्वर- वन्देमातरम्" स्वरांजलि संगीत उत्सव में देश भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रबंध अध्ययन संकाय (एफएमएस) सभागार में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में इंदौर के पंडित गौतम काले के नेतृत्व में व संगीत विभाग के अध्यक्ष डॉ पामिल मोदी के साथ समूह के 24 सदस्यों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां से सभी का मन मोह लिया। स्वरांजलि में गौतम काले ने देशभक्ति, राष्ट्र प्रेम और वंदेमातरम के समकालीन तत्वों के साथ बलिदानियों की भावनाएं और उनके देशभक्ति के जज्बें को शब्दों, सुरों और संगीत के माध्यम से संगीत प्रस्तुतियों को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला बाल विकास राज्यमंत्री प्रो मंजू बाघमार उपस्थित थीं, जबकि अध्यक्षता कुलगुरु प्रो बीपी सारस्वत ने की।

सांगीतिक प्रस्तुतियों से उठी देशभक्ति की लहर

कार्यक्रम की शुरूआत में पं काले एवं डॉ पामिल मोदी एवं समूह ने मातृ भू की आराधना-वंदना "वसुंधरा परिवार हमारा" प्रस्तुत किया। इसके बाद "हमें वीर केशव मिले आप जब से, हमें साधना की नई डगर मिल गई..." पेश कर समा बाँध दिया। "निर्मल पाएँ भावना यही राष्ट्र आराधना" प्रस्तुति में देश के प्रति बलिदान होने वाले क्रांतिकारियों की देश के प्रति मनोस्थितियों को उजागर किया गया। "पूज्य माँ की अर्चना की एक छोटा उपकरण हूँ" प्रस्तुति में यह संदेश दिया गया कि जब समाज को वीर केशव जैसे प्रेरणादायक नेता और मार्गदर्शक मिलते हैं, तब लोगों में देशसेवा, त्याग और अनुशासन की भावना जागृत होती है। उनके विचारों और आदर्शों से प्रभावित होकर लोग अपने जीवन को राष्ट्र के हित में समर्पित करने के लिए प्रेरित होते हैं।

समर्पण और शौर्य के सुरों से गुंजायमान हुआ सभागार

वहीं, एक अन्य प्रस्तुति "मन समर्पित, तन समर्पित और ये जीवन समर्पित, चाहता हूँ मातृ भू तुझको अभी कुछ और भी दूँ" गीत एकता, साहस और देशभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं। उनके मार्गदर्शन से लोग सही दिशा में आगे बढ़ते हैं और देश व समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लेते हैं। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में "ले चले हम राष्ट्र नौका को भंवर से पार तक केसरी बाना सजाये वीर का श्रृंगार कर" प्रस्तुतियां भी पेश की गई जिन्हें सुनकर प्रतिभागियों में देशभक्ति की लहर उठी और भारत माता की जय के नारे लगने लगे। सही मायने में जो व्यक्ति देश से जुडा रहता है उसके लिए राष्ट्र प्रथम होता है और हर नागरिक को राष्ट्र प्रथम के लिए देश से जुडे रहना चाहिए।

कलाकारों की टोली और सुर-संगम

इस संगीत कार्यक्रम में पंडित काले एवं पामिल मोदी के साथ हिमांशी शिमली, हिमांक गंधर्व, तितिक्षा आर्य, ज्योतिबाला स्वर्णकार, अंजलि जैन, प्रिया सुथार, सुमित मोंडल, देवेश मालव, निखिल कुमार सात्संगी, मनीषा दाधीच, प्रभात गरासिया, आदर्श नायक, अमिताभ जैन, चेतना मकवाना, कीर्ति सेठ, मनीषा पवार, निकुंज गुप्ता, प्रज्ञा शर्मा, सावन गर्ग, वंशिता पांडे, विशाल राठौड़ एवं धनंजय ध्रुव ने कोरस में गीत प्रस्तुत किए। वाद्ययंत्रों पर गिटार पर हर्ष वर्धन धांधड़ा, तबला पर हृतिक कुमावत व हरिओम तिवारी, हारमोनियम पर जितेश सोलंकी, ऑक्टोपैड पर भेरू तथा कीबोर्ड पर विजय धांधड़ा ने संगत की।

राष्ट्र प्रथम की भावना: अतिथियों के विचार

कुलगुरु प्रो बीपी सारस्वत ने अपने संबोधन में कहा कि "संघ के सौ साल की यात्रा एक ऐसी कठिन यात्रा है जिसमें लोगों ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। तब जाकर सौ साल का यह वटवृक्ष खडा हुआ है।" वहीं प्रो मंजू बाघमार ने कहा कि "जब तक लोगों के लिए राष्ट्र प्रथम रहेगा तब तक समाज और संस्थाएं सुरक्षित रहेंगी। समाज और संस्थाएं सुरक्षित रहेंगे तो सभी सुरक्षित रहेंगे।" स्वरांजलि में गौतम काले ने देशभक्ति, राष्ट्र प्रेम और वंदेमातरम के समकालीन तत्वों के साथ बलिदानियों की भावनाएं और उनके देशभक्ति के जज्बें को जीवंत कर दिया।

इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो मीरा माथुर, कुलसचिव डा वीसी गर्ग, वित्त नियंत्रक गिरीश कच्छारा, परीक्षा नियंत्रक मुकेश बारबर, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अलका मूंदड़ा, पूर्व जिला प्रमुख शांति लाल मेघवाल, पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर उमाशंकर शर्मा, भाजपा के प्रदेश प्रतिनिधि प्रमोद सामर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग संघ चालक हेमेन्द्र श्रीमाली, संगीत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा प्रेम भंडारी, प्रोफ़ेसर साधना कोठारी, प्रोफ़ेसर महीप भटनागर सहित विश्वविद्यालय के सभी डीन, डाइरेक्टर्स, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित थे। इस अवसर पर अतिथियों ने पोस्टर विमोचन भी किया।

Pratahkal Bureau

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