शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से आमजन को राहत पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए निरस्त भूखंडों की बहाली के नियमों में बड़ी छूट प्रदान की है। नगरीय विकास एवं आवासन विभाग द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब पिछले सात वर्षों में बकाया राशि के कारण निरस्त हुए भूखंडों को पुनः बहाल कराया जा सकेगा। इस फैसले को हजारों भूखंडधारकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, 12 जून से प्रारंभ हुए शहरी सेवा शिविरों के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण अपेक्षित लाभ नहीं मिलने की समस्या उठाई थी। यह मुद्दा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा के समक्ष रखा गया था। इसके बाद विधायक संदीप शर्मा ने जयपुर में नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा से मुलाकात कर नियमों में शिथिलता देने तथा आमजन को अधिक राहत उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

इस पहल के बाद विभाग द्वारा बुधवार को नया आदेश जारी किया गया। आदेश के अनुसार, लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित वे भूखंड, जो निर्धारित समयावधि में बकाया राशि जमा नहीं होने के कारण निरस्त कर दिए गए थे, अब ब्याज एवं शास्ति सहित बकाया राशि जमा कर पुनः बहाल कराए जा सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले ऐसे मामलों में बहाली के लिए केवल दो वर्ष की समय सीमा निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर सात वर्ष कर दिया गया है।

नए प्रावधान के तहत पिछले सात वर्षों में बकाया भुगतान के कारण निरस्त हुए भूखंडों की बहाली स्थानीय नगरीय निकाय स्तर पर ही की जा सकेगी। इसके लिए अब जयपुर स्थित मुख्यालय से स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ आवेदकों को समय पर राहत मिलने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

आदेश जारी होने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा विधायक संदीप शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान एकमुश्त लीज राशि जमा करने पर ब्याज एवं पेनल्टी में छूट, इकरारनामे के आधार पर अंतिम क्रेता के नाम हस्तांतरण तथा एकमुश्त यूडी टैक्स जमा कराने जैसी मांगें भी प्रमुखता से उठाई गईं।

विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शहरी सेवा शिविरों से जुड़े अन्य मामलों में भी राहत प्रदान करने के लिए जल्द ही और सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।

इस निर्णय का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि वर्षों से लंबित मामलों में फंसे अनेक भूखंडधारकों को अब अपने निरस्त भूखंडों को पुनः प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, बहाली प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर सरल बनाए जाने से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी तेजी आने की उम्मीद है।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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