विश्व थायरॉइड दिवस के उपलक्ष्य में कोटा में निशुल्क थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TFT) शिविर का आयोजन किया जाएगा, विशेषज्ञ डॉ. पार्थ जेठवानी ने टी3 थेरेपी को बताया नया विकल्प।

कोटा। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के प्रति चेतना जाग्रत करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 25 मई को मनाया जाने वाला 'विश्व थायरॉइड दिवस' इस बार देश में युवाओं और महिलाओं के बदलते स्वास्थ्य पैटर्न पर गंभीर विमर्श लेकर आया है। इस विशेष दिवस का मुख्य उद्देश्य आमजन में थायरॉइड संबंधी गंभीर बीमारियों के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना तथा समय रहते जांच एवं सटीक उपचार के महत्व को समझाना है। मानव शरीर में थायरॉइड ग्रंथि एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, हृदय की सुचारू कार्यप्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य एवं शारीरिक विकास को सीधे तौर पर नियंत्रित करती है।


इसी संदर्भ में चिकित्सा क्षेत्र के जाने-माने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. पार्थ जेठवानी (MD, DM – Endocrinology) ने इस बढ़ते खतरे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान समय में थायरॉइड संबंधी बीमारियां बेहद तेजी से पैर पसार रही हैं, और इसका सबसे ज्यादा तथा सीधा असर महिलाओं एवं युवाओं पर देखा जा रहा है। चिकित्सकीय दृष्टि से मुख्य रूप से थायरॉइड की दो प्रमुख समस्याएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं, जिन्हें हाइपोथायरॉइडिज्म अर्थात शरीर में थायरॉइड का स्तर कम होना और हाइपरथायरॉइडिज्म यानी थायरॉइड का स्तर आवश्यकता से अधिक होना कहा जाता है।


इन दोनों ही बीमारियों के लक्षण और मानव शरीर पर इनके प्रभाव बिल्कुल भिन्न हैं। डॉ. पार्थ जेठवानी के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म से पीड़ित मरीजों में अत्यधिक थकान एवं कमजोरी महसूस होना, अचानक वजन बढ़ना, सामान्य से अधिक ठंड लगना, बालों का अत्यधिक झड़ना एवं त्वचा का पूरी तरह सूखना, याददाश्त एवं ध्यान केंद्रित करने में कमी आना तथा महिलाओं में विशेष रूप से मासिक धर्म का अनियमित होना शामिल है। इसके विपरीत, हाइपरथायरॉइडिज्म के शिकार मरीजों में तेजी से वजन कम होना, दिल की धड़कन का अचानक तेज होना, हर समय घबराहट एवं बेचैनी बने रहना, शरीर से अधिक पसीना आना, हाथों का कांपना तथा गंभीर रूप से नींद की समस्या जैसी शिकायतें प्रमुखता से देखी जाती हैं।


इस बीमारी का सबसे संवेदनशील और नकारात्मक प्रभाव गर्भावस्था तथा बच्चों पर पड़ता है। थायरॉइड के कारण महिलाओं को गर्भधारण करने में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है, वहीं इसके कारण गर्भपात का खतरा भी अत्यधिक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, यह समस्या समय से पूर्व प्रसव की संभावना को बढ़ा देती है और गर्भ में पल रहे बच्चे के मानसिक एवं शारीरिक विकास पर बेहद बुरा असर डालती है। बच्चों में थायरॉइड के संभावित प्रभावों की बात करें तो इससे उनका शारीरिक विकास अत्यंत धीमा हो जाता है, उनकी पढ़ाई एवं याददाश्त पर प्रतिकूल असर पड़ता है, तथा उनमें निरंतर सुस्ती एवं ध्यान की कमी बनी रहती है। सबसे गंभीर बात यह है कि जन्मजात मामलों में बच्चों का मानसिक विकास पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि लंबे समय तक इस बीमारी का सही इलाज न कराया जाए तो यह आगे चलकर हृदय संबंधी गंभीर बीमारियां, शरीर में कोलेस्ट्रॉल का अचानक बढ़ना, हड्डियों का अत्यधिक कमजोर होना तथा मनुष्य के संपूर्ण प्रजनन एवं मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करने जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।


उपचार के क्षेत्र में आई नई वैज्ञानिक प्रगति और अपडेट की जानकारी देते हुए डॉ. पार्थ जेठवानी ने बताया कि सामान्यतः हाइपोथायरॉइडिज्म के उपचार में मरीजों को T4 यानी लेवोथायरॉक्सिन नामक दवा दी जाती है। हालांकि, कुछ विशेष मरीजों में इस नियमित दवा के बाद भी लक्षण लगातार बने रहते हैं, ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अब T3 थेरेपी या फिर T4 + T3 कॉम्बिनेशन थेरेपी एक बेहद उपयोगी और प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। डॉ. जेठवानी ने विशेष रूप से सचेत किया कि यह उन्नत उपचार केवल और केवल किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की प्रत्यक्ष देखरेख और सलाह से ही लिया जाना चाहिए।


इसी कड़ी में, विश्व थायरॉइड दिवस के पावन अवसर पर आमजन को राहत और चिकित्सा परामर्श प्रदान करने के लिए कोटा में एक विशेष पहल की जा रही है। डॉ. राकेश जिंदल ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि रविवार, 24 मई को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक एक वृहद थायरॉइड जागरूकता सेमिनार एवं निशुल्क थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TFT) जांच शिविर का विशेष आयोजन किया जाएगा। इस शिविर के माध्यम से आम नागरिकों को थायरॉइड रोगों, उनके प्रारंभिक लक्षणों, उनसे बचाव के उपायों एवं आधुनिक उपचार संबंधी विस्तृत जानकारियां प्रदान की जाएंगी तथा जरूरतमंद लोगों की आवश्यक जांचें भी मौके पर की जाएंगी।


चिकित्सकों और विशेषज्ञों का यह स्पष्ट मत है कि जागरूकता, समय पर सही पहचान एवं सटीक उपचार के माध्यम से थायरॉइड जैसे रोगों को पूरी तरह और प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। इसी संकल्प के साथ चिकित्सा जगत ने "स्वस्थ थायरॉइड, स्वस्थ जीवन" का एक सशक्त संदेश प्रसारित किया है ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सके।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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