कोटा। संध्याकालीन मंगल जिनदेशना के दौरान मांगलिया मंडाना में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के बीच परमपूज्य आचार्य 108 प्रज्ञासागर जी मुनिराज ने जीवन में संयम, विवेक और शीघ्र निर्णय की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में अनेक अवसर ऐसे आते हैं जब शुभ और मंगलकारी कार्यों को तुरंत करने की आवश्यकता होती है, लेकिन टालमटोल की प्रवृत्ति उसे आध्यात्मिक उन्नति से दूर ले जाती है। इसलिए सत्कर्म में विलंब न कर, उसे तुरंत करना ही श्रेष्ठ है।

आचार्यश्री ने अपने संदेश में क्रोध को जीवन के लिए बाधक बताते हुए कहा कि क्रोध की पहली लहर जब भी मन में उठे, तब केवल पाँच मिनट धैर्य रख लें। यही पाँच मिनट मनुष्य को आत्मविजय के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इन पाँच मिनटों पर नियंत्रण करना सीख लेता है, वही सच्चा विजयी कहलाता है। परिवर्तन किसी लंबी संघर्षयात्रा से नहीं, बल्कि इन कुछ मिनटों के धैर्य और संयम से आता है।

उन्होंने आगे समझाया कि अक्सर क्रोध का कारण हमें सही लगता है, परंतु वास्तविकता यह है कि सत्य पर कभी क्रोध नहीं आता। सत्य मार्गदर्शक होता है, जबकि असत्य और तुच्छ बातें केवल उलझाने का कार्य करती हैं। ऐसे में मौन और धैर्य ही सर्वोत्तम प्रतिक्रिया है। जो बात जीवन में सुधार नहीं ला रही, उसे त्याग देना ही उत्तम है।

उदाहरण देते हुए आचार्य प्रज्ञासागर जी ने कहा कि लोग अंधविश्वास में बिल्ली के रास्ता काटने पर रुक जाते हैं, परंतु जब जीवन में क्रोध, मान, माया, लोभ, राग–द्वेष या ईर्ष्या जैसा कोई दोष मार्ग में आए, तब विराम लेने की आवश्यकता समझ नहीं पाते। उन्होंने कहा कि प्रत्येक समस्या एक कारण से जुड़ी होती है। यदि कारण को पहचानकर उसका निवारण कर लिया जाए, तो वही समस्या दोबारा जीवन में प्रवेश नहीं करती। अन्यथा मनुष्य भूल दोहराते हुए स्वयं को दुःखों में उलझाए रखता है।

आचार्यश्री ने इसे ‘पाँच मिनट की साधना’ बताया और कहा कि यही साधना मनुष्य को पंच परमेष्ठी जैसे उच्च आध्यात्मिक पद की ओर ले जाने में सहायक बनती है। यह साधना न केवल संयम का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि आत्मबल और विवेक को भी मजबूत करती है।

मंगल जिनदेशना के इस पावन अवसर पर गुरु आस्था परिवार के अध्यक्ष लोकेश जैन, चेयरमैन यतिश जैन खेड़ावाला, महामंत्री नवीन जैन दौराया, कोषाध्यक्ष अजय जैन खटकीड़ा सहित अनेक गणमान्य जैन समाजजनों व श्रद्धालुओं ने विनम्रता से उपस्थित होकर धर्म–संदेश का लाभ लिया। कार्यक्रम में भक्तों की आस्था और अनुशासन का प्रेरणादायक दृश्य देखने योग्य रहा।

आचार्य प्रज्ञासागर जी की यह प्रेरक जिनदेशना श्रद्धालुओं के मन में संयम का संकल्प जागृत करते हुए इस संदेश के साथ पूर्ण हुई कि शुभ में विलंब न करें और क्रोध के आवेश में पड़ने से पूर्व बस पाँच मिनट रुक जाएँ — जीवन स्वयमेव मंगलमय हो उठेगा।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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